ट्रंप द्वारा कुछ पेटेंट दवाओं पर शुल्क लगाने की घोषणा से भारत के सुरक्षित रहने की संभावना

भारत अमेरिका को मुख्य रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाएं ही निर्यात करता है
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नयी दिल्ली : आर्थिक थिंक टैंक जीटीआरआई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा से भारत के काफी हद तक सुरक्षित रहने की संभावना है, क्योंकि देश अमेरिका को मुख्य रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाएं ही निर्यात करता है। ट्रंप ने दो अप्रैल को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कुछ पेटेंट दवाओं और संबंधित दवा सामग्री के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की गई है।

भारत का दबदबा : ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने एक रिपोर्ट में कहा कि इस कदम ने ''भारत को काफी हद तक सुरक्षित रखा है, क्योंकि अमेरिका को कम लागत वाली जेनेरिक दवा निर्यात में भारत का दबदबा है।''

फिलहाल इन्हें शुल्क से छूट : अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है और फिलहाल इन्हें शुल्क से छूट दी गई है। वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर मूल्य की दवाओं का निर्यात किया, जो उसके 25.8 अरब डॉलर के कुल वैश्विक औषधि निर्यात का 38 प्रतिशत है।

भविष्य को लेकर अनिश्चितता : जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, हालांकि ब्रांडेड या विशिष्ट उपयोग वाली दवाएं बनाने वाली भारतीय कंपनियां या पेटेंट दवाओं के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली कंपनियों को इस शुल्क के दबाव का सामना करना पड़ सकता है। यदि शुल्क का दायरा जेनेरिक दवाओं तक बढ़ाया जाता है तो भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है। 100 प्रतिशत शुल्क मुख्य रूप से आयरलैंड, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, बेल्जियम, डेनमार्क, ब्रिटेन और जापान को प्रभावित करेगा, जो अमेरिका को पेटेंट और उच्च मूल्य वाली दवाओं के प्रमुख निर्यातक हैं।

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