

हैदराबाद : केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास, कृत्रिम मेधा (एआई), श्रम गतिशीलता और गरिमापूर्ण रोजगार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और विशाल श्रमशक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे में आपसी सहयोग से भविष्य की अधिक समावेशी और मानव-केंद्रित कार्य संस्कृति विकसित की जा सकती है।
'ब्रिक्स ट्रेड यूनियन फोरम समिट-2026' के उद्घाटन के बाद मांडविया ने कहा कि 15 जुलाई को हैदराबाद में होने वाली ब्रिक्स श्रम एवं रोजगार मंत्रियों की बैठक इस सम्मेलन की सिफारिशों को ठोस नीतियों और व्यावहारिक परिणामों में बदलने का अहम अवसर होगी।
उन्होंने कहा कि भारत में रोजगार सृजन सरकार की विकास रणनीति का प्रमुख आधार है। पिछले एक दशक में करीब 17 करोड़ रोजगार अवसर सृजित किए गए हैं। उनके अनुसार, बेरोजगारी दर 2017 के छह प्रतिशत से घटकर 2025 में 3.1 प्रतिशत रह गई है, जबकि महिला श्रम भागीदारी 22 प्रतिशत से बढ़कर 38.8 प्रतिशत हो गई है।
मांडविया ने बताया कि इस गति को बनाए रखने के लिए सरकार ने 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार' योजना शुरू की है, जिसका लक्ष्य अगले दो वर्षों में 3.5 करोड़ औपचारिक नौकरियां सृजित करना है।
उन्होंने कहा कि ईपीएफओ और ईएसआईसी में सुधार के जरिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। वर्तमान में ईपीएफओ के आठ करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य और 80 लाख पेंशनभोगी हैं, जबकि ईएसआईसी 15 करोड़ से अधिक बीमित लोगों और उनके आश्रितों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
मांडविया के अनुसार, देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गया है, जिससे करीब 94 करोड़ लोग लाभान्वित हो रहे हैं। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि 2026 में यह संख्या 100 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा कि भारत नैतिक और जिम्मेदार एआई, डिजिटल साक्षरता तथा श्रमिकों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा का समर्थक है, ताकि तकनीकी बदलाव के इस दौर में सभी को समान और न्यायसंगत अवसर मिल सकें।