

नई दिल्ली : नीति आयोग के पहले ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स’ में गुजरात निवेश आकर्षित करने की क्षमता के मामले में बड़े राज्यों में शीर्ष पर रहा है। सूचकांक में किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश को 60 अंक नहीं मिले। गुजरात ने 56.6 अंक के साथ पहला स्थान हासिल किया, जबकि महाराष्ट्र 53.7, तमिलनाडु 53.3 और ओडिशा 52.4 अंक के साथ उसके बाद रहे।
नीति आयोग ने 28 राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों का मूल्यांकन 100 अंकों के पैमाने पर किया। इसके लिए बुनियादी ढांचे, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियों, नियामकीय सुगमता, वित्तीय स्थिति, संस्थागत माहौल और पर्यावरणीय मजबूती जैसे आठ क्षेत्रों के 84 संकेतकों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन में 1,850 निवेशकों के सर्वेक्षण और 165 हितधारकों से परामर्श को भी शामिल किया गया।
कुल पांच राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 50 से अधिक अंक हासिल कर ‘शीर्ष प्रदर्शनकर्ता’ श्रेणी में रहे। इनमें गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा शामिल हैं। 15 राज्य 45 से 50 अंक के साथ ‘अग्रणी’ श्रेणी में रहे, जबकि आठ-आठ राज्य ‘उभरते प्रदर्शनकर्ता’ और ‘आकांक्षी राज्य’ श्रेणियों में रखे गए।
भौगोलिक और आर्थिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए राज्यों को तीन समूहों में बांटा गया। 17 बड़े राज्यों में गुजरात शीर्ष पर रहा। 12 पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में उत्तराखंड 47.5 अंक के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि असम और हिमाचल प्रदेश उसके बाद रहे। सात छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की श्रेणी में गोवा शीर्ष पर रहा, जिसके बाद दिल्ली और चंडीगढ़ का स्थान रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात की मजबूत बंदरगाह व्यवस्था, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति और अनुकूल कारोबारी माहौल उसकी प्रमुख ताकत हैं। महाराष्ट्र को निजी निवेश, वित्तीय बाजारों और नवाचार से लाभ मिला, जबकि तमिलनाडु विनिर्माण, निर्यात और बुनियादी ढांचे के मामले में मजबूत रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, निवेश आकर्षित करने के लिए केवल कर रियायतें या सरकारी प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं हैं। कुशल प्रतिभा, राजनीतिक और नीतिगत स्थिरता, बेहतर कनेक्टिविटी तथा समयबद्ध और पूर्वानुमानित मंजूरी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निवेशकों के लिए अनिश्चितता और लंबी मंजूरी प्रक्रिया बड़ी बाधाएं बनती हैं।
हालांकि, सूचकांक और वास्तविक निवेश प्रवाह में कुछ अंतर भी दिखाई देता है। कर्नाटक शीर्ष श्रेणी में नहीं होने के बावजूद विदेशी निवेश, तकनीक और स्टार्टअप के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। वहीं, ओडिशा सूचकांक में चौथे स्थान पर है, लेकिन वहां निवेश प्रवाह अपेक्षाकृत सीमित रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूचकांक का पहला संस्करण उन राज्यों को स्वाभाविक रूप से लाभ पहुंचाता है, जिन्होंने लंबे समय में मजबूत औद्योगिक और संस्थागत ढांचा विकसित किया है। आने वाले वर्षों में इसके संस्करणों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कौन से राज्य नियामकीय सुगमता और नीतिगत सुधारों के मामले में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
नीति आयोग का यह सूचकांक राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा के लिए एक साझा मानक उपलब्ध कराता है। भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के बीच यह सूचकांक राज्यों को निवेश, रोजगार और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अपनी नीतियों और कारोबारी माहौल में सुधार करने की दिशा भी दिखाता है।