घटकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है GDP वृद्धि

ऊर्जा संकट, कमजोर मानसून और वैश्विक सुस्ती से विकास पर दबाव
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नयी दिल्ली : ऊर्जा की कमी, सामान्य से कम मानसून और वैश्विक वृद्धि में सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने यह अनुमान जताया। भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2025-26 में 7.7 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत रही थी। एसएंडपी का वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 प्रतिशत के अनुमान के अनुरूप है।

क्या है कारण : अल नीनो के कारण मानसूनी बारिश प्रभावित हुई है। 22 जून तक बारिश की कमी बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई है। कम बारिश की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने राज्यों के लिए योजनाएं बनाई हैं। इसके तहत कम बारिश वाले हालात के हिसाब से वैकल्पिक फसलों की सिफारिश की गई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत आयात करता है और वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी से उसका आयात बिल बढ़ा है और कुल मिलाकर महंगाई बढ़ी है। एसएंडपी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस क्षेत्र का परिदृश्य मजबूत वैश्विक गतिविधियों, ऊर्जा बाजार में दबाव और एआई-संचालित प्रौद्योगिकी के निर्यात में उछाल से तय हो रहा है।

ऊर्जा संकट का असर : पश्चिम एशिया में संघर्ष से पैदा हुए ऊर्जा संकट का असर दिख रहा है। उद्योग को कच्चे माल की लागत और आपूर्तिकर्ता के डिलिवरी समय में काफी बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, खाद की ऊंची कीमतें खाद्य उत्पादन पर असर डालती हैं और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ाती हैं। बढ़ती महंगाई लोगों की खरीद क्षमता को कम कर रही है। इससे वृद्धि पर असर पड़ रहा है। एसएंडपी ने कहा कि उर्वरक कीमतों में तेज बढ़ोतरी खाद्य उत्पादन पर असर डाल सकती है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ा सकती है।

कितनी रहेगी महंगाई : एसएंडपी ने कहा कि भारत में तीसरी तिमाही में उपभोक्ता महंगाई 0.5 से 0.6 प्रतिशत अधिक होगी और चालू वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो जाएगी। इसका कारण विनिर्माता ऊर्जा की बढ़ी हुई लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रहे हैं। साथ ही हाल ही में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में नीतिगत दर रेपो में वृद्धि का अनुमान है।

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