वैज्ञानिक तरीके से खदान बंद करने के लिए 40,000 करोड़ का कोष बनाया : कोयला मंत्री

पहली रिपोर्ट ‘आरोह’ जारी, 42 कोयला खदानें वैज्ञानिक रूप से बंद; अगले 2-3 वर्षों में 147 खदानों की चरणबद्ध बंदी के लिए व्यापक तंत्र तैयार
पिछले एक वर्ष में भारत ने 42 कोयला खदानों, जिनमें 33 ब्लॉक शामिल हैं, को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया है।
वैज्ञानिक तरीके से खदान बंद करने के लिए 40,000 करोड़ का कोष बनाया
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नई दिल्ली : कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि सरकार ने वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से खदानों को बंद करने के लिए करीब 40,000 करोड़ का कोष बनाया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक और चरणबद्ध खदान बंदी के लिए बनाए गए इस समर्पित कोष से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार खनन, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और खनन प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता जाहिर होती है।

रेड्डी भारत में वैज्ञानिक खदान बंदी और उसके बाद भूमि के पुन: उपयोग से जुड़ी प्रथाओं पर पहली रिपोर्ट ‘आरोह’ जारी करने के अवसर पर बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में भारत ने 42 कोयला खदानों, जिनमें 33 ब्लॉक शामिल हैं, को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया है।

उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में करीब 147 खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए खदान बंदी से जुड़ा एक व्यापक तंत्र विकसित किया गया है।

खदान बंदी को नए अवसरों की शुरुआत के रूप में देखने पर जोर

कोयला मंत्री ने कहा कि भारत ने खदान बंदी की अपनी सोच में बुनियादी बदलाव किया है। अब इसे खनन के अंत के रूप में नहीं, बल्कि लोगों, स्थानीय समुदायों और सतत विकास के लिए नए अवसरों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक खदान बंदी राष्ट्रीय प्राथमिकता है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण आधार है।

कोयला मंत्रालय ने खदान बंदी के लिए RECLAIM फ्रेमवर्क, SUVIKALP डिजिटल प्लेटफॉर्म, A.R.T.H.A. फ्रेमवर्क और जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली खदान बंदी सलाहकार समितियों के जरिए व्यापक व्यवस्था तैयार की है।

सामुदायिक विकास के लिए 10,000 करोड़ की निवेश क्षमता

रेड्डी ने बताया कि पहली बार स्वीकृत खदान बंदी लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा सामुदायिक विकास के लिए निर्धारित किया गया है। इससे अगले दशक में करीब ₹10,000 करोड़ की निवेश क्षमता पैदा होने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि देशभर में पुनर्विकसित खदान भूमि का इस्तेमाल नवीकरणीय ऊर्जा, इको-टूरिज्म, जल संरक्षण, कृषि, सामुदायिक बुनियादी ढांचे और सतत आजीविका के लिए किया जा रहा है।

खदान बंदी के लिए भारत-जर्मनी सहयोग

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि खदान बंदी खनन के पूरे जीवनचक्र का एक महत्वपूर्ण चरण है। जिम्मेदार खनन के बाद पर्यावरण बहाली, भूमि के पुन: उपयोग और सतत सामुदायिक विकास पर ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि ‘माइन क्लोजर गाइडलाइंस, 2025’ और विभिन्न डिजिटल उपकरणों के जरिए खदान बंदी को केवल नियामकीय औपचारिकता के बजाय योजनाबद्ध और जन-केंद्रित प्रक्रिया में बदला गया है।

भारत-जर्मनी हरित एवं सतत विकास साझेदारी के तहत बंद होने वाली कोयला खदानों से जुड़े तकनीकी सहयोग समझौते का भी उल्लेख किया गया। इस परियोजना के लिए जर्मनी और यूरोपीय संघ की ओर से 1 करोड़ यूरो का अनुदान दिया जाएगा। इससे भारत को वैज्ञानिक खदान बंदी में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने में मदद मिलेगी।

सरकार का लक्ष्य बंद हो चुकी प्रत्येक खदान को पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय विकास और रोजगार के नए अवसरों के केंद्र में बदलना है, ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक समृद्धि का रास्ता तैयार किया जा सके।

पिछले एक वर्ष में भारत ने 42 कोयला खदानों, जिनमें 33 ब्लॉक शामिल हैं, को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया है।
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