प्याज की कीमतों में गिरावट से संकट में किसान

प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है
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मुंबई : महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ ने सरकार से प्याज की कीमतों में आई तेज गिरावट को रोकने के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) तुरंत लागू करने का आह्वान किया है। संघ का कहना है कि कीमतों में गिरावट से किसान गंभीर वित्तीय संकट में फंस गए हैं। महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले ने कहा कि प्याज की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक गिरावट आई है, जो स्पष्ट रूप से संकटग्रस्त बिक्री की स्थिति को दर्शाती है और एमआईएस लागू करने के मानदंडों को पूरा करती है।

राहत देने के लिए शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह : यदि तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे । उन्होंने सरकार से किसानों को राहत देने के लिए शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया। बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस), पीएम-आशा का एक हिस्सा है। इसका उद्देश्य किसानों को उन कृषि एवं बागवानी उत्पादों की खरीद के लिए उचित मूल्य उपलब्ध कराना है जो नाशवान (पेरिशेबल) होते हैं और मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के दायरे में नहीं आते।

भारी नुकसान : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एवं सुनेत्रा पवार को भेजे गए ज्ञापन में दिघोले ने कहा कि समूचे महाराष्ट्र में प्याज उत्पादकों को कृषि उपज मंडी समितियों (एपीएमसी) में कीमतों में तेज गिरावट के कारण भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि यह योजना लागू की जाती है तो बाजार में सरकार के खरीदार के रूप में प्रवेश से कीमतों को स्थिर करने, घबराहट में बिक्री को रोकने तथा व्यापारियों द्वारा दरें दबाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

कम दाम पर बिक्री : किसानों को फिलहाल प्याज के लिए 300 से 800 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं, जो अनुमानित 1,500 से 1,800 रुपये प्रति क्विंटल उत्पादन लागत के आधे से भी कम है। मौजूदा कीमतें तो कटाई और परिवहन लागत तक को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं जिससे किसान मजबूरी में कम दाम पर बिक्री कर रहे हैं।

सड़क पर प्याज फेंकने के लिए मजबूर : कई मामलों में किसानों को कम कीमतों के कारण सड़क पर प्याज फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य सरकार एमआईएस लागू करने के लिए तुरंत केंद्र को प्रस्ताव भेजे और योजना को केवल जिलों तक सीमित रखने के बजाय तालुका स्तर पर लागू किया जाए। उन्होंने हर प्याज उत्पादक तालुका में सरकारी खरीद केंद्र स्थापित करने और उत्पादन लागत के आधार पर न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने की भी मांग की। किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने के लिए मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपी) को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है।

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