

मुंबई : पश्चिम एशिया शांति वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अमेरिकी मुद्रा में स्थिरता और कच्चे तेल की अस्थिर कीमतों के कारण रुपया मंगलवार को 28 पैसे टूटकर 93.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख भी स्थानीय मुद्रा को सहारा नहीं दे पाया। इस पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हाल के कदम का भी असर पड़ा, जिसमें नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में सट्टेबाजी से जुड़े प्रतिबंधों में ढील दी गई है। आरबीआई ने सोमवार को रुपये में अत्यधिक सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने के लिए एक अप्रैल को जारी किए गए निर्देशों को आंशिक रूप से वापस ले लिया। रिजर्व बैंक ने एनडीएफ बाजारों में शुद्ध खुली स्थिति (कुल विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों और देनदारियों के बीच अंतर) की सीमा 10 करोड़ डॉलर तय की थी और बैंकों को 10 अप्रैल तक इसका पालन करने का आदेश दिया था। एनडीएफ एक तरह का विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध होता है, जिसमें असली मुद्रा की डिलीवरी नहीं होती, बल्कि केवल कीमत के अंतर का भुगतान नकद में किया जाता है।
क्या रही स्थिति : अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 93.25 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 93.63 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक गिर गया। कारोबार के अंत में यह 28 पैसे की गिरावट के साथ 93.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। सोमवार को रुपया 25 पैसे टूटकर 93.16 पर बंद हुआ था। हालांकि उससे पहले दो सत्रों में इसमें 47 पैसे की मजबूती आई थी।
रुपये पर दबाव बढ़ा : मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से रुपये पर दबाव बढ़ा है। डॉलर की मजबूती ने भी घरेलू मुद्रा को कमजोर किया, लेकिन वैश्विक शेयर बाजारों की मजबूती ने गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.19 प्रतिशत बढ़कर 98.09 पर पहुंच गया।
ब्रेंट क्रूड वायदा : अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.81 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।