

नई दिल्ली: घर, कार या पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक अहम खबर है। देश के कई बड़े बैंकों ने कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे लाखों ग्राहकों की मासिक किस्त (EMI) बढ़ सकती है। देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 से 10 बेसिस पॉइंट तक इजाफा किया है। इसके बाद अन्य बैंकों ने भी अपनी दरों में संशोधन शुरू कर दिया है।
हाल ही में Reserve Bank of India ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा था। इसके बावजूद बैंकों का कहना है कि उनकी फंडिंग कॉस्ट और जमा राशि जुटाने की लागत बढ़ रही है। इसी दबाव के चलते MCLR में बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर पड़ने वाला है।
HDFC Bank ने अपने एक साल के MCLR को 8.35 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.40 प्रतिशत कर दिया है। एक साल की अवधि वाला MCLR सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अधिकांश रिटेल लोन इसी से जुड़े होते हैं। वहीं दो साल की अवधि वाले MCLR में 10 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 8.55 प्रतिशत कर दिया गया है।
Indian Bank
इंडियन बैंक ने अपने एक साल के MCLR में 10 बेसिस पॉइंट की वृद्धि कर इसे 8.55 प्रतिशत कर दिया है।
Bank of Baroda
बैंक ऑफ बड़ौदा ने विभिन्न अवधियों के MCLR में 0.05 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।
1 वर्ष का MCLR: 8.70% से बढ़कर 8.75%
6 माह का MCLR: 8.45% से बढ़कर 8.50%
3 माह का MCLR: 8.15% से बढ़कर 8.20%
1 माह का MCLR: 7.90% से बढ़कर 7.95%
1 दिन का MCLR: 7.80% से बढ़कर 7.85%
Canara Bank
केनरा बैंक ने भी कई अवधि के MCLR में 5 बेसिस पॉइंट की वृद्धि की है।
1 दिन: 7.90% से 7.95%
1 माह: 7.95% से 8.00%
3 माह: 8.20% से 8.25%
6 माह: 8.55% से 8.60%
Bank of India
बैंक ऑफ इंडिया ने भी एक साल के MCLR को बढ़ाकर 8.75 प्रतिशत कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार जिन ग्राहकों के होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन MCLR आधारित फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़े हैं, उनकी लोन रीसेट डेट आने पर EMI बढ़ सकती है। यदि ग्राहक EMI नहीं बढ़ाना चाहते तो बैंक लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं, जिससे कुल ब्याज भुगतान और अधिक हो जाएगा।
इसके अलावा नए लोन लेने वाले ग्राहकों को भी पहले की तुलना में अधिक ब्याज दर चुकानी पड़ सकती है। ऐसे में घर या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए कर्ज की लागत बढ़ने की संभावना है।
वित्तीय विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि ग्राहक अपने लोन की शर्तों की समीक्षा करें और यह जांचें कि उनका ऋण MCLR आधारित है या किसी अन्य बेंचमार्क से जुड़ा है। जिनके पास अतिरिक्त धन उपलब्ध है, वे आंशिक प्री-पेमेंट कर ब्याज का बोझ कम कर सकते हैं।
बैंकों की इस ताजा पहल से साफ है कि भले ही रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ हो, लेकिन कर्ज लेना अब पहले की तुलना में थोड़ा महंगा साबित हो सकता है।