

मुंबई : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव इस सप्ताह शेयर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले और मुद्रास्फीति के आंकड़े भी बाजार को प्रभावित करेंगे। भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विशेष नजर रहेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों पर उनका प्रभाव बाजार की समग्र दिशा को प्रभावित कर सकता है।
पिछले सप्ताह भारी दबाव में रहे : घरेलू मोर्चे पर, बाजार थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति, व्यापार संतुलन के आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे प्रमुख व्यापक आर्थिक संकेतकों पर नजर रखेंगे। वैश्विक जोखिम धारणा बिगड़ने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार पिछले सप्ताह भारी दबाव में रहे।
काफी उतार-चढ़ाव : आने वाले सप्ताह में काफी उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण पोत परिवहन में होने वाली किसी भी देरी के चलते भारत जैसे उभरते बाजारों में वैश्विक पूंजी आवंटन पर असर पड़ सकता है। इस सप्ताह निवेशकों की नजर यूरो क्षेत्र के सीपीआई आंकड़ों, बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) और यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) के नीतिगत फैसलों तथा अमेरिकी नौकरियों के आंकड़ों पर भी रहेगी।