

सेंट पीटर्सबर्ग : अगले एक दशक में वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा, जबकि वैश्विक बिजली खपत में वृद्धि का 15 प्रतिशत योगदान भी भारत का होगा। इससे भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा बाजारों में से एक बन जाएगा। रूस की पेट्रोलियम कंपनी रोसनेफ्ट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) इगोर सेचिन ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था आज वैश्विक ऊर्जा खपत वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभा रही है।
कितनी होगी मांग : सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए सेचिन ने कहा कि वर्ष 2035 तक भारत की कच्चे तेल की खपत 44 प्रतिशत बढ़कर लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। वहीं बिजली की मांग में करीब 80 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इसके लगभग 3,000 टेरावाट-घंटे तक पहुंचने का अनुमान है, जो वर्तमान में यूरोपीय संघ की बिजली खपत के स्तर के करीब होगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुमान के अनुसार, अगले दस साल में वैश्विक बिजली मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा। इसी अवधि में वैश्विक तेल मांग वृद्धि का लगभग आधा योगदान भी भारत का होगा।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम : सेचिन ने चेताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा तनाव और व्यापक भू-राजनीतिक संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। भारत की आयातित ऊर्जा पर बढ़ती निर्भरता को देखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं की पूर्ति को प्रभावित कर सकता है। होर्मुज क्षेत्र में तनाव का असर केवल तेल और गैस बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उर्वरक आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य कीमतों में वृद्धि का खतरा बढ़ेगा।
रूसी तेल आपूर्ति : उन्होंने दावा किया कि रूस की चीन और भारत के साथ ऊर्जा साझेदारी दोनों देशों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करती है। अप्रैल, 2022 से अब तक रूसी तेल आपूर्ति से भारत और चीन को संयुक्त रूप से 40 अरब डॉलर से अधिक का आर्थिक लाभ हुआ है। 2022 के बाद से रोसनेफ्ट ने भारत के साथ अपने संबंधों को और मजबूत किया है। कंपनी भारत को कच्चे तेल की प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गई है। रोसनेफ्ट की नायरा एनर्जी में 49.13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो गुजरात में दो करोड़ टन सालाना क्षमता वाली रिफाइनरी और देशव्यापी ईंधन खुदरा नेटवर्क का संचालन करती है। भारतीय कंपनियां रूस के तेल और गैस क्षेत्रों में भी रोसनेफ्ट की साझेदार हैं।