PM मोदी ने ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर को नमन कर शुरू किया बिहार चुनाव अभियान

कर्पूरी ठाकुर को उनके पैतृक गांव में जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
मोदी ने समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम पहुंचकर दिवंगत नेता के परिजनों से भेंट की
मोदी ने समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम पहुंचकर दिवंगत नेता के परिजनों से भेंट की-
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समस्तीपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के चुनाव अभियान की शुरुआत से पहले समाजवादी नेता एवं भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित ‘जननायक’ कर्पूरी ठाकुर को उनके पैतृक गांव में जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और कर्पूरी ठाकुर के पुत्र एवं केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर के साथ समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम पहुंचकर दिवंगत नेता के परिजनों से भेंट की। इस गांव का नाम समाजवादी आंदोलन के पुरोधा ठाकुर के नाम पर रखा गया है, जिन्हें लगभग दो वर्ष पूर्व मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।

इसके बाद समस्तीपुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने RJD-कांग्रेस नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन पर तीखा प्रहार किया और आरोप लगाया कि 'घोटालों में लिप्त और जमानत पर बाहर' नेता कर्पूरी ठाकुर की विरासत 'चुराने' की कोशिश कर रहे हैं।

मोदी ने कहा, 'कांग्रेस और RJD के कुछ नेता जमानत पर बाहर हैं। ये लोग भ्रष्टाचार के आरोपी हैं। चोरी इनके स्वभाव में शामिल हो गई है और अब ये ‘जननायक’ की उपाधि तक चुराने चले हैं। यह समाजवाद के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर का अपमान है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिहार की जनता ऐसे अपमान को कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

मोदी ने ठाकुर को सामाजिक समानता का अग्रदूत बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्गों के उत्थान के लिए चल रही योजनाओं और आरक्षण के विस्तार के माध्यम से उनके विचारों और नीतियों को आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा, कर्पूरी ठाकुर ने गरीबों, पिछड़ों और वंचितों के लिए जीवन समर्पित किया। हमारी सरकार शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से उनके मिशन को आगे बढ़ा रही है।

कर्पूरी ठाकुर 1967 में बिहार में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार में उपमुख्यमंत्री बने थे जिसका नेतृत्व महामाया प्रसाद सिन्हा कर रहे थे।

तीन वर्ष बाद उन्होंने एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व भी किया। 1977 में जनता पार्टी की लहर पर सवार होकर वे मुख्यमंत्री बने और मुंगेरी लाल आयोग की सिफारिशों के आधार पर पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू करने के लिए याद किए जाते हैं।

हालांकि, बहुमत होने के बावजूद आंतरिक कलह के कारण उनकी सरकार 1979 में गिर गई थी।

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