

पटना : बिहार में पटना के एक निजी अस्पताल में कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को दम तोड़ने वाली 18 वर्षीय मेडिकल (नीट) अभ्यर्थी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना के पीछे ‘यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता’।
हालांकि, परिजनों द्वारा शुरू में मारपीट और यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बावजूद पुलिस ने दावा किया था कि मेडिकल रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज में ऐसी किसी घटना के संकेत नहीं मिले हैं।
पुलिस ने 13 जनवरी को जारी बयान में कहा था, डॉक्टरों को यौन उत्पीड़न के कोई निशान नहीं मिले हैं और लड़की ने बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां खाई थीं तथा वह टाइफाइड से पीड़ित थी।
जहानाबाद की रहने वाली छात्रा इस महीने की शुरुआत में चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित शंभू हॉस्टल में अपने कमरे में अचेत अवस्था में पाई गई थी। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उसकी मौत के बाद परिजनों ने दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाते हुए मामले में लीपापोती का आरोप लगाया, जिससे व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए।
पुलिस ने गुरुवार को उस भवन के मालिक मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया, जिसमें यह महिला छात्रावास (गर्ल्स हॉस्टल) संचालित हो रहा था।
पुलिस द्वारा जारी बयान के अनुसार, लड़की की पोस्टमार्टम रिपोर्ट 14 जनवरी को प्राप्त हुई है, जिसमें डॉक्टरों ने कहा है कि ‘यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता’। मामले की आगे जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गुरुवार को पटना की सड़कों पर प्रदर्शन तेज हो गए।
राजधानी में इनकम टैक्स चौराहे पर नीट अभ्यर्थियों ने मार्च निकाला और बिहार पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। इस बीच, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के शुक्रवार को जहानाबाद के फरीदपुर में मृतका के परिजनों से मिलने की संभावना है।
ये भी पढ़ें : बिहार विधानमंडल का बजट सत्र 2 से 27 फरवरी तक