

पटना : बिहार के शिक्षक रोशन आनंद को पटना स्थित खान ग्लोबल कोचिंग इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ के मामले में जमानत मिल गई है।
रोशन आनंद के वकील निरंजन कुमार सिंह ने कहा कि रोशन आनंद के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी गढ़ी हुई, पूर्वनियोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित थी। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) को गलत तरीके से लगाया गया, क्योंकि मामले में आरोपी की मंशा, जानकारी और घटनास्थल पर उपस्थिति जैसे कानूनी तत्व मौजूद नहीं थे।
सिंह ने फैसल खान उर्फ खान सर को ‘प्रभावशाली व्यक्ति’ बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अपने ‘राजनीतिक प्रभाव’ का इस्तेमाल करके रोशन आनंद की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने कहा, सबूतों के अभाव के बावजूद रोशन आनंद को जेल भेज दिया गया। यह सब एक साजिश और खान सर के उस कथित बयान के आधार पर हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि आठ-दस राउंड गोलियां चलने की आवाज सुनी गई थी।
वकील ने यह भी दावा किया कि खान सर के खिलाफ दर्ज प्रतिवाद प्राथमिकी में शस्त्र अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत गंभीर आरोप होने के बावजूद संबंधित पक्ष ने ‘तथ्यों को छिपाकर और बयान बदलकर’ अंतरिम राहत हासिल कर ली।
सिंह ने मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोगों द्वारा पुलिस का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रोशन आनंद के खिलाफ रची गई आपराधिक साजिश उनके भाई प्रिंस यादव की मौत का कारण भी हो सकती है।
खान ग्लोबल कोचिंग इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ के मामले में नामजद प्रिंस यादव शनिवार रात नेपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए थे।
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर उनके साथियों ने उन्हें विराटनगर के एक अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। दो जून को हुई तोड़फोड़ की घटना के बाद प्रिंस यादव नेपाल चले गए थे।
इस बीच, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, बिहार के प्रतिष्ठित ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के निदेशक के भाई की संदिग्ध मौत अथवा हत्या की सभी पहलुओं से उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कोचिंग क्षेत्र में हाल के विवाद पूरे शिक्षा जगत के लिए उचित नहीं हैं। इस पूरे मामले में बिहार सरकार और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में दिखाई देती है।