बढ़ती आबादी और मुकदमों के लिए न्यायिक ढांचे का विस्तार जरूरी: CJI

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बढ़ती आबादी और मुकदमों के लिए न्यायिक ढांचे का विस्तार जरूरी: CJI
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पटना: भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे का विकास बेहद जरूरी है ताकि बढ़ती आबादी, बढ़ते मुकदमों और जटिल होते विवादों से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। बिहार के दो-दिवसीय दौरे पर आए सीजएआई पटना उच्च न्यायालय परिसर में बुनियादी ढांचों से जुड़ीं सात परियोजनाओं का शिलान्यास करने के बाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

सात परियोजनाओं में एक एडीआर भवन एवं सभागार, एक आईटी भवन, एक प्रशासनिक भवन, बहु-स्तरीय कार पार्किंग, एक अस्पताल, पटना उच्च न्यायालय के कर्मचारियों के लिए एक आवासीय भवन तथा महाधिवक्ता कार्यालय का एक सौध भवन शामिल हैं।

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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने संबोधन में कहा, “पटना उच्च न्यायालय के प्रशासनिक ब्लॉक, आईटी ब्लॉक और अन्य सुविधाओं के लिए शिलान्यास अत्यंत महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है कि इस अवसर का बिहार में और भी गहरा महत्व है, जो भारत की सभ्यतागत स्मृति में एक विशिष्ट स्थान रखता है।” उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली के दक्षता विकास का मतलब है कि उसे बढ़ती आबादी, ज्यादा मुकदमों और जटिल विवादों का सामना करने के लिए तैयार किया जाए।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि बिहार में हमेशा से यह समझ रही है कि न्याय कई तरह से हो सकता है, और यहां न्याय का मतलब एक ऐसा सही व नैतिक तरीका अपनाना है जो दूसरों के प्रति सहानुभूति, जिम्मेदारी व समाज की सहमति पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि अदालतों के पास ऐसे संसाधान होने चाहिए जो न्यायिक शक्तियों का सही व प्रभावी तरीके से उपयोग करने में मदद करें। सीजेआई ने कहा, “इस प्रयास का पहला आयाम संस्थागत क्षमता है। एक आधुनिक प्रशासनिक भवन न्यायालय के लिए तंत्रिका तंत्र की तरह कार्य करता है।”

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