बिहार : 13 जिलों में बाढ़ से हालात गंभीर

विस्थापितों को अब भी मदद और पुनर्वास की दरकार
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पटना : बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गुरुवार को आठ प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं। गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा नदियों में जल स्तर बढ़ गया है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

बाढ़ से 13 जिले प्रभावित हुए हैं और कई क्षेत्रों में बढ़ते जलस्तर के कारण लोगों को व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। पटना प्रशासन हाई अलर्ट पर है, क्योंकि गंगा, सोन और पुनपुन नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया है। पटना में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।

गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 127 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है, जबकि दीघा घाट पर गंगा का जलस्तर 61 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से लगभग 2.01 मीटर ऊपर बह रही है, जिससे बाढ़ का पानी आसपास के घरों में घुस रहा है।

इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी में 5.54 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया है, जिसके परिणामस्वरूप मनेर, दानापुर, बख्तियारपुर और मोकामा के नदी तटीय क्षेत्रों में पानी तेजी से फैल गया है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए 12 सरकारी नौकाएं तैनात की हैं।

समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.50 मीटर ऊपर चढ़ गया है। हाथीदाह और कहलगांव में भी गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मुंगेर में भी गंगा चेतावनी स्तर को पार कर चुकी है।

भागलपुर में गंगा के किनारे हो रहे भीषण कटाव ने राघोपुर-काजीकोरिया तटबंध और रेलवे के बांध की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। बांध की सुरक्षा के लिए अधिकारी चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। मिट्टी के कटाव को रोकने के अभियान के तहत रेत की बोरियों को लाने-ले जाने और गिराने के लिए लगभग 200 ट्रैक्टर और तीन स्टीमर तैनात किए गए हैं।

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रोहतास के नौहट्टा में सोन नदी का बढ़ता जलस्तर लगभग 100 लोगों को नदी के छोटे-छोटे द्वीपों पर फंसे होने का कारण बना है, जहां वे कृषि गतिविधियों में लगे हुए थे। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण अधिकारी उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रहे हैं।

बाढ़ प्रभावित जिलों में दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगुसराय, भागलपुर, समस्तीपुर और मुंगेर शामिल हैं। बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के साथ ही प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता प्रदान करने की तैयारी शुरू हो गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने अधिकारियों को बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। इस आकलन में फसलों, पशुधन और घरों को हुए नुकसान को शामिल किया जाएगा, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र परिवारों को शीघ्र ही राहत सहायता प्राप्त हो।

राज्यभर में बाढ़ की स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए अधिकारी नदी के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।

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