

सबिता, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखोपाध्याय के ऐतिहासिक योगदान, राष्ट्रवादी दर्शन और देशभक्ति को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत करने के लिए राज्य सरकार वर्षभर कई कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। न्यू टाउन के ईको पार्क में 125 फुट ऊंची खड़ी प्रतिमा और संग्रहालय का निर्माण के अलावा उनके पैतृक निवास का जीर्णोद्धार करने का अहम फैसला लिया गया है। अब अगले शैक्षणिक सत्र से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान से संबंधित अध्यायों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा। उनका यह योगदान स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर तक के पाठ्यक्रम में शामिल होगा। राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति की पहली बैठक में इन सभी परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी दे दी गई। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि राज्य का शिक्षा विभाग अगले शैक्षणिक सत्र से श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान से संबंधित अध्यायों को पाठ्यक्रम में शामिल करेगा। यह निर्णय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रमों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के लिए गठित विशेष समिति की पहली बैठक में लिया गया।
ईको पार्क में प्रतिमा, जिराट में लाइब्रेरी और संग्रहालय
सीएम ने कहा कि न्यू टाउन के ईको पार्क में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फुट ऊंची खड़ी प्रतिमा स्थापित करने के लिए जमीन का चयन और भूमिपूजन पहले ही किया जा चुका है। हिडको के द्वारा एक विशेष पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तावित प्रतिमा, संग्रहालय और उससे जुड़ी अन्य आधारभूत सुविधाओं की पूरी रूपरेखा तथा डिजाइन समिति के सामने प्रस्तुत की गई। इसके अलावा, हुगली के जिराट में श्यामाप्रसाद मुखोपाध्याय के पैतृक घर के स्थान पर राज्य सरकार द्वारा खरीदी गई 30 डिसमिल जमीन पर दो परियोजनाओं को भी कमेटी ने मंजूरी दी है। वहां 'सर आशुतोष मुखोपाध्याय' के नाम पर आधुनिक तकनीक से सुसज्जित एक पुस्तकालय और एक भव्य संग्रहालय बनाया जाएगा।
दो विशेष पुस्तकों का प्रकाशन, आम जनता भी दे सकेगी सुझाव
वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों के तहत दो विशेष पुस्तकों के प्रकाशन की योजना बनाई गई है। सीएम ने कहा कि इसके अलावा राज्य सरकार के जनशिक्षा प्रसार एवं पुस्तकालय सेवा विभाग को नोडल एजेंसी बनाकर बंगाली और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक विस्तृत पुस्तिका प्रकाशित करने के लिए विशेष समिति का गठन किया गया है। आम लोगों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से सुझाव और प्रस्ताव लेने के लिए सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से एक विशेष डिजिटल पोर्टल शुरू किया जा रहा है।