

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : 'सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार'—इस कहावत के पीछे सागरद्वीप तक पहुंचने की कठिन यात्रा की लंबी कहानी छिपी है। ट्रेन, बस और फिर नदी पार करने का झंझट भरा सफर आज भी श्रद्धालुओं के धैर्य की परीक्षा लेता है लेकिन इस साल के गंगासागर मेले में इस तस्वीर को बदलने की व्यापक तैयारी की गई है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य प्रशासन मेले के दौरान दिन-रात फेरी सेवा चालू रखने पर विचार कर रहा है। हालांकि, यह सेवा हर दिन के मौसम और कोहरे की स्थिति पर निर्भर करेगा। पिछले रविवार से ही मेले के लिए ज़मीन, जल और आकाश—तीनों मार्गों से परिवहन व्यवस्था को और भी मजबूत किया जा रहा है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस बार हजारों अतिरिक्त बसें, कई विशेष ट्रेनों के साथ-साथ जलमार्ग पर बड़ी संख्या में वेसल व बार्ज तैनात रहेंगे।
जिला प्रशासन और PWD के सूत्रों के अनुसार, काकद्वीप के लॉट-8 और नामखाना रूट पर 13 बड़े बार्ज तैनात किये जा रहे हैं, जिनमें एक-एक की क्षमता एक हजार से ढाई हजार यात्रियों की होगी। इसके अलावा 45 आधुनिक वेसल और 100 से अधिक लकड़ी की लॉन्च श्रद्धालुओं को कचुबेरिया जेटी तक पहुंचाएंगी।
कुल 21 जेटी (10 स्थायी और 11 अस्थायी) से आवागमन होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यहा तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। सभी वेसल और बार्ज में जीपीएस ट्रैकर लगाए जा रहे हैं, जिनकी निगरानी सागर मेला कंट्रोल रूम से की जाएगी। साथ ही वेसल में बाइक ले जाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।