

प्रसेनजीत, सन्मार्ग संवाददाता
सागर: गंगासागर में मकर संक्रांति के पावन स्नान के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमेशा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रही है। इस बार गंगासागर में एक नई तकनीकी पहल उस चुनौती को आसान बनाने जा रही है। पहली बार गंगासागर में वॉटर रेस्क्यू ड्रोन को प्रयोगात्मक रूप से तैनात किया गया है, जो डूबते श्रद्धालुओं को बचाने में अहम भूमिका निभाएगा।
यह विशेष जल-ड्रोन पानी में किसी भी डूबते व्यक्ति की पहचान कर सकता है और पलों में उसके पास पहुँच जाता है। ड्रोन में लगी उन्नत तकनीक के ज़रिये वह डूबते व्यक्ति को पानी से बाहर खींचने में सक्षम है। अब तक लाइफगार्ड, नाव और गोताखोरो पर निर्भर बचाव व्यवस्था में यह ड्रोन एक नया और तेज़ विकल्प जोड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इस अनोखी पहल को राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने लागू किया है। दक्षिण 24 परगना के जिलाधिकारी अरविंद मीणा ने बताया कि फिलहाल यह ड्रोन ट्रायल रन में है। उन्होंने कहा, “पूरी तरह चालू हो जाने पर यह गंगासागर में स्नान के दौरान श्रद्धालुओं के लिए किसी चमत्कारी रक्षक से कम नहीं होगा।” प्रशासन का मानना है कि भीड़ और तेज़ धाराओं के बीच यह तकनीक कई अनमोल जानें बचा सकती है। गंगासागर में जल-ड्रोन की यह पहल आस्था और आधुनिक तकनीक के सफल संगम की मिसाल बन रही हैं।