

मालदा : अफीम की अवैध खेती के लिए चर्चित मालदा जिले में पुलिस और प्रशासन अब ड्रोन के जरिए निगरानी बढ़ाने की तैयारी में हैं। अधिकारियों का उद्देश्य अफीम की खेती का नया सीजन शुरू होने से पहले उन इलाकों की पहचान करना है, जहां बड़े पैमाने पर पोस्ता उगाया जाता है।
पुलिस के अनुसार, इस वर्ष पोस्ता उत्पादन नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। जिले के कालियाचक और बैष्णवनगर थाना क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में पोस्ता की खेती बढ़ी है।
पुलिस के लिए इन खेतों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि किसान कई बार पोस्ता के पौधों को छिपाने के लिए आसपास मक्का और गन्ने जैसी फसलें उगाते हैं। स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से कार्रवाई भी कठिन होती है।
हवाई निगरानी से होगी खेतों की पहचान
एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक ड्रोन से ली गई तस्वीरों और हवाई सर्वेक्षण के जरिए संदिग्ध खेतों का पता लगाने में मदद मिलेगी। पुलिस ने सरकार से ड्रोन कैमरे उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी भेजा है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पोस्ता की खेती के संभावित समय को देखते हुए निगरानी व्यवस्था पहले से मजबूत करने की तैयारी है।
हजारों हेक्टेयर फसल नष्ट, फिर भी चुनौती कायम
पुलिस और अन्य एजेंसियों ने इस वर्ष करीब 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध पोस्ता की फसल नष्ट की थी। इसके बावजूद मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।
सूखाए गए पोस्ता से अफीम तैयार की जाती है, जबकि इससे जुड़े नशीले पदार्थों की तस्करी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि ड्रोन निगरानी से अवैध खेती के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।