

पांडवेश्वर : करीब एक महीने पहले राजनीतिक उठा-पटक और छापों की आंच में झुलसी नवग्राम पंचायत आज पूरी तरह से लावारिश हो चुकी है। प्रधान, उप-प्रधान सहित बहुसंख्यक पंचायत सदस्यों के एक साथ दिए गए सामूहिक इस्तीफे के बाद से यहां का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह वेंटिलेटर पर है। आलम यह है कि रोज कमाने-खाने वाले गरीब मजदूर अपने जरूरी कागजात, प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
125 दिन की रोजगार गारंटी योजना पर लगा 'ब्रेक'
केंद्र व राज्य सरकार ने 100 दिनों के रोजगार योजना को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है, लेकिन धरातल पर नवग्राम पंचायत के मजदूरों के लिए यह योजना दूर का ढोल बनकर रह गई है। पंचायत में कामकाज पूरी तरह ठप होने के कारण अब ग्रामीणों को छोटे-से-छोटे काम के लिए भी पांडवेश्वर ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। दैनिक मजदूरों के लिए संकट दोहरा है, कारण एक तरफ पंचायत स्तर पर कोई सुनवाई नहीं है, दूसरी तरफ BDO दफ्तर जाने के चक्कर में उनकी दिनभर की दिहाड़ी भी मारी जा रही है। ग्रामीण शेख जुबेर ने कहा, "हम बार-बार पंचायत के चक्कर काटकर थक चुके हैं। सरकार ने 125 दिन के काम का ऐलान तो कर दिया, लेकिन पंचायत में न तो प्रधान हैं और न ही उप-प्रधान। हमें कोई यह बताने वाला भी नहीं है कि काम कब और कैसे मिलेगा।" हालांकि, वर्तमान सत्तारूढ़ दल भाजपा के स्थानीय नेता और कार्यकर्ता कैंप लगाकर आम लोगों की मदद का दावा कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि प्रशासनिक तंत्र (प्रधान और सदस्यों) के बिना विकास कार्यों को गति कैसे मिलेगी?
आखिर क्यों आया यह प्रशासनिक संकट ?
गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले इलाके में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। बंकोला सुभाष कॉलोनी स्थित पूर्व विधायक नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती के घर के पास बने एक गोदाम से भारी मात्रा में सरकारी राहत सामग्री बरामद हुई थी। इसके साथ ही, ईसीएल के रिटायर्ड कर्मियों के लिए बने गेस्ट हाउस के एक लग्जरी बेडरूम से कुछ आपत्तिजनक वस्तुएं भी मिली थीं। नवग्राम के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द पंचायत को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए वैकल्पिक या तदर्थ व्यवस्था की जाए, ताकि 125 दिनों की रोजगार योजना समेत अन्य जनहित के काम दोबारा शुरू हो सकें।