CM ने की घोषणा, आंदोलन के दौरान कुड़मी समाज के लोगों पर हुए मामले लिए जाएंगे वापस

कुड़मी समाज के लोगों को संबोधित करते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
कुड़मी समाज के लोगों को संबोधित करते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
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पुरुलिया : कुड़मी आंदोलन के दौरान रेल रोको अभियान को लेकर पुरुलिया में तनाव फैल गया था और आंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे। अब उन मुकदमों को राज्य सरकार वापस लेगी। इसकी घोषणा रविवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की। वे कुड़मी समाज द्वारा पुरुलिया 1 नंबर ब्लॉक की चाकलतोड़ ग्राम पंचायत के करम पर्बतिया महाजड़ुआही में बने मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुर्गापुर की प्रशासनिक बैठक में मुकदमे वापस लेने की बात उन्होंने कही थी। वे मुकदमे वापस लिए जाएंगे। जातीय पहचान के आंदोलन में आदिवासी कुड़मी समाज के रेल रोको अभियान को लेकर पिछली सरकार ने नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर जो झूठे मुकदमे दर्ज किए थे, वे सभी वापस लिए जाएंगे। ​इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुड़मी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों को लेकर भी बड़ा संदेश दिया। बिश्वजीत महतो ने पत्र लिखा था और अजीत महतो ने उन्हें फोन किया था। मुख्यमंत्री ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) कमेटी काम कर रही है। इसमें उन्होंने कुड़मी समाज को बाहर रखा है। आप अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और अधिकार मुझसे प्राप्त कर लीजिएगा। मुख्यमंत्री के इस घोषणा के बाद आदिवासी कुड़मी समाज में खुशी की लहर है।

कब हुआ था आंदोलन

बता दें कि दुर्गा पूजा से पहले 20 सितंबर 2025 यह रेल रोको आंदोलन हुआ था। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जब कुड़मी नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने नाकेबंदी की कोशिश की, तो पुलिस ने कार्रवाई की। रेलवे और राज्य पुलिस के तीन मामलों में कुल 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पुरुलिया जिला पुलिस ने 29 लोगों को और आरपीएफ ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया था। दोनों ने मिलकर 51 लोगों पर मामला दर्ज किया था। पहले भी कुड़मी आंदोलन पर आरपीएफ ने मामले दर्ज किए थे।

कुरमाली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा

​हर साल 20 सितंबर को आदिवासी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी कुड़मी समाज रेल रोको आंदोलन करता था। लेकिन राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी भाजपा सरकार द्वारा कुरमाली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की घोषणा के बाद कुड़मी समाज इस आंदोलन से पीछे हट गया। यहां तक कि देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी कुड़मी समाज के लोगों के साथ कई बैठकों में उनकी मुख्य मांग को पूरा करने का आश्वासन दिया है। ​

अजीत प्रसाद महतो ने कहा

कुड़मी समाज के प्रमुख अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पर संज्ञान लिया है और सभी मुकदमे वापस लेने की घोषणा की है। इससे साबित होता है कि उनका आंदोलन सही था।

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