बांकुड़ा में 3 शीर्ष माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

मुख्यधारा में लौटने के लिए छोड़ी बंदूक और जंगल की जिंदगी
सरेंडर करने वाले माओवादी
सरेंडर करने वाले माओवादी
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संजय, सन्मार्ग संवाददाता

बांकुड़ा : सक्रिय तीन शीर्ष माओवादी नेताओं ने हिंसा का रास्ता त्यागते हुए बांकुड़ा पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। बांकुड़ा पुलिस लाइन के सम्मेलन कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में तीनों ने राज्य पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी, पश्चिमांचल) आनंद कुमार के समक्ष अपने हथियार सौंप दिए। सरेंडर करने वालों में 15 लाख का इनामी जोनल/रीजनल कमेटी सदस्य राम प्रसाद मांडी उर्फ सचिन, 10 लाख की इनामी जोनल कमेटी सदस्य मिता उर्फ नयनतारा और बेलपहाड़ी दस्ते की ओवरग्राउंड आयोजक जबा महतो (पूर्व दस्ता कमांडर मदन महतो की पत्नी) शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ये नेता सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश के नेतृत्व वाले समूह से जुड़े थे और दालमा, घाटशिला, पटमदा, बांकुड़ा, झाड़ग्राम अंतरराज्यीय कॉरिडोर में सक्रिय थे। आत्मसमर्पण के दौरान इन पूर्व नक्सलियों ने पुलिस को एक एके-47 राइफल, दो इंसास राइफलें, 10 मैगजीन और 154 राउंड जिंदा कारतूस सौंपे।

घेराबंदी के बाद 35 किमी के दायरे में सिमटा था दस्ता

अधिकारियों के मुताबिक, यह सरेंडर झारखंड के सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में सीआरपीएफ, कोबरा और राज्य पुलिस द्वारा महीनों से चलाए जा रहे संयुक्त ऑपरेशन का नतीजा है। पूर्वी सिंहभूम के नक्सल मुक्त घोषित होने के बाद यह दस्ता दालमा और घाटशिला के बीच महज 30-35 किलोमीटर के संकरे दायरे में सिमट गया था। स्थानीय नेटवर्क टूटने और रसद की सप्लाई पूरी तरह बंद होने के बाद इन्होंने मध्यस्थों के जरिए बांकुड़ा पुलिस से संपर्क साधा। वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से बंगाल, झारखंड, ओडिशा त्रि-जंक्शन पर बचे हुए माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।

                                                             ''सशस्त्र क्रांति का रास्ता गलत''

आत्मसमर्पण के बाद पूर्व माओवादियों ने कहा कि जंगलमहल क्षेत्र में उपेक्षा और वंचना के कारण उन्होंने हथियार उठाए थे, लेकिन अब उन्हें अहसास हो चुका है कि हिंसा और बंदूक के बल पर किसी मांग को पूरा नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा कि वे बंदूक और जंगल की जिंदगी से तंग आकर अब सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीना चाहते हैं।

मिलेगा पुनर्वास नीति का लाभ लेकिन मुकदमों से राहत नहीं

एडीजी आनंद कुमार ने बताया कि बांकुड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पीवीजी सतीश और उनकी टीम के सतत प्रयासों के चलते यह सफलता मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व माओवादियों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ दिलाने के लिए पुलिस स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करेगी, ताकि वे सामान्य जीवन शुरू कर सकें। ये नक्सली 2006 से 2014 के बीच बंगाल में कई बड़ी वारदातों में शामिल रहे हैं।

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