

डॉली सोच रही थी, डॉक्टर की पत्नी होने के नाते अकेले घर में रहना, शॉपिंग पर जाना और फिर घर में आकर कैद हो जाना, क्या यही जिंदगी है? उन्हें मेरे से ज्यादा प्रिय अस्पताल और क्लीनिक हैं। मेरे लिए तो वह सप्ताह में छुट्टी के एक दिन भी घर में नहीं बैठना चाहते। डाली को लगता था कि उसके पति का मन उससे भर गया है। अभी तो विवाह को दो वर्ष ही हुए हैं।
रश्मि को भी अपने पति से कुछ ऐसी ही शिकायत थी, पहले तो मेरे पति मेरे साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहते थे लेकिन शादी के एक साल बाद से ही वह मेरे से दूर-दूर रहने का प्रयास करने लगे हैं। क्या अब मेरे अंदर वह आकर्षण नहीं जो उन्हें मेरे से बांधे रख सके?
आज यह रोना सौ में अस्सी प्रतिशत महिलाओं का है। वे पति से प्रायः इसी कारण नाराज भी रहती हैं क्योंकि पत्नी की दिली इच्छा रहती है कि पति उसके अनुरूप कोई काम करें। वह उसके नजदीक रहे और सफर में साथ दें पर सवाल उठता है कि वह क्या है जो पति को सम्मोहन में बांध सके?
स्वभाव से ही प्रकृति से जहां पुरुषों को ताक-झांक करने का अंदाज मिला है, वहीं नारी को उस अंदाज को लगाम देने की क्षमता भी। वह काम नारी बड़ी सरलता से कर सकती है बशर्ते उसमें पुरुष की प्रकृति को समझने की क्षमता हो।
वैसे तो पति-पत्नी दोनों दो अलग-अलग परिवेशों में बड़े होते हैं। दोनों में विवाह के समय अपनी आदतें और रुचियां विकसित हो चुकी होती हैं। यदि दोनों की रुचियां समान हैं तब तो कोई परेशानी नहीं वरना पारिवारिक सुख-शांति के लिए समझौता करना पड़ता है। चूंकि आज तक स्त्री को ही समझौता करते देखा गया है, इसलिए समझौते की अपेक्षा कदम कभी भी बहक सकते हैं।
यह नहीं कि पत्नी अपनी रुचियां त्यागकर सिर्फ पति की ही इच्छाओं का ध्यान रखे पर इतना तो जरूर ध्यान रखना होगा कि पति अगर कोई कार्य करता है तो पत्नी और बच्चों के लिए ही। अपना स्वार्थ बहुत थोड़ा ही रहता है। तो फिर उसका सम्मान तो घर में होना ही चाहिए।
आज भी बहुत सी पत्नियां काम पर से लौट कर आए थके हारे पति से बातों का सिलसिला पड़ोसी, सास, ननद, जेठानी पर ही खत्म करती हैं। फिर आगे बढ़ती हैं, गैस खत्म हो गई, बिजली बिल जमा करना है, दूधवाला आज दूध नहीं दे गया जैसी अनेक उबाऊ बातें करती हैं। आखिर क्या है इसमें पति को सम्मोहन में बांधने लायक मसाला?
क्यों नहीं इस तरह शुरू करतीं, ‘तुम्हारा वह मरीज अब कैसा है?‘ ‘कैसी रही तुम्हारी आज की मीटिंग?‘ ‘शहर में तुम्हारा आजकल बहुत नाम चल रहा है,’ जैसी सब बातों से शुरू किया गया वार्तालाप दाम्पत्य जीवन को आनन्द से भर देगा।
माना कि कुछ पुरुष जिद्दी और घमंडी होते हैं। वे अपनी बातों पर व्यर्थ ही डटे रहते हैं पर कहीं न कहीं टूटने की क्षमता उनमें भी होती है क्योंकि उनके दिल में भी मानवता का बीज होता है। आप उसे ढूंढ कर वैसा ही व्यवहार करें तो निश्चय ही बंध जाएंगे आपके पति आपके सम्मोहन में। प्रयत्न करके तो देखिए। दिलीप कुमार झा(उर्वशी)