नई दिल्ली। ईरान संघर्ष के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर बने दबाव का असर अब भारत के ईंधन बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बीच सरकार ने वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में जल्द ही देश में E85 पेट्रोल की बिक्री शुरू किए जाने की तैयारी है, जिसे पारंपरिक पेट्रोल से काफी सस्ता बताया जा रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है। इसी दबाव के चलते भारत में मई महीने के दौरान कई बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 मई के बाद से पेट्रोल में प्रति लीटर करीब 7 रुपये से अधिक और डीजल में भी इसी के आसपास वृद्धि देखी गई है।
इस स्थिति के बीच सरकार अब ऐसे ईंधन विकल्पों पर जोर दे रही है, जो आयात पर निर्भरता को कम कर सकें।
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने E85 ईंधन के लिए नई डिस्पेंसिंग व्यवस्था शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इस नई फ्यूल तकनीक के तहत अब ईंधन पंपों पर E85 पेट्रोल उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा का उद्घाटन हाल ही में किया गया, जिससे यह संकेत मिला है कि आने वाले समय में इसका विस्तार तेजी से किया जाएगा।
E85 एक मिश्रित ईंधन है, जिसमें लगभग 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल शामिल होता है। यह पारंपरिक पेट्रोल के मुकाबले सस्ता विकल्प माना जा रहा है।
सरकारी योजना के तहत इसकी कीमत सामान्य E20 पेट्रोल से करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक कम रखी जा सकती है। हालांकि इसकी ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कम होने के कारण इसकी कीमत भी उसी अनुपात में संतुलित की गई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इथेनॉल आधारित ईंधन पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत बेहतर है और इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता भी कम होती है। मौजूदा वैश्विक हालात में यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में देश के कई शहरों में E85 की उपलब्धता बढ़ाई जाए। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है और पेट्रोल पंप नेटवर्क को अपग्रेड किया जा रहा है।
यदि योजना सफल रहती है, तो यह भारत के फ्यूल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भी कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।