श्रीनगर: कश्मीर में 16 जनवरी से पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव होने का अनुमान है, जिससे घाटी में हल्के से मध्यम हिमपात का नया दौर शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को क्षेत्र में मौसम प्रणाली को प्रभावित करने वाला एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ आने का अनुमान है और इसके तीन दिन बाद एक अधिक मजबूत तंत्र का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
इस सर्दी में ऊंचे इलाकों में हिमपात हुआ है, लेकिन मैदानी इलाकों में लंबे समय से सूखा जारी है। वर्षा की कमी के कारण हवा में प्रदूषकों की मात्रा बढ़ गई है, जिसके चलते श्रीनगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 के आसपास बना हुआ है। सोमवार शाम को ग्रीष्मकालीन राजधानी में एक्यूआई 500 तक पहुंच गया। अधिकारी ने बताया कि इस बीच, सोमवार रात न्यूनतम तापमान गिरने से घाटी में शीतलहर की स्थिति और तीव्र हो गई। श्रीनगर में सोमवार रात न्यूनतम तापमान शून्य से 4.9 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जो पिछली रात के शून्य से 2.4 डिग्री सेल्सियस नीचे से काफी कम था।
गांदरबल जिले का सोनमर्ग, घाटी का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां तापमान शून्य से 7.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए आधार शिविर पहलगाम में तापमान शून्य से 6.2 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। उत्तरी कश्मीर के स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग में पारा शून्य से 3.5 डिग्री सेल्सियस नीचे तक गिर गया। काजीगुंड जैसे अन्य स्थानों पर न्यूनतम तापमान शून्य से 5.0 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया, जबकि कोकरनाग में शून्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस नीचे और कुपवाड़ा में शून्य से 5.8 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान रहा।
यह क्षेत्र वर्तमान में "चिल्ला-ए-कलां" की चपेट में है। यह 21 दिसंबर से शुरू होकर 30 जनवरी को समाप्त होने वाली 40 दिन की अत्यधिक ठंड की अवधि है। इस दौरान तापमान अक्सर हिमांक बिंदु से काफी नीचे गिर जाता है और हिमपात की संभावना सबसे अधिक होती है। हालांकि, इस मौसम में अब तक मैदानी इलाकों में हिमपात नहीं हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने 21 जनवरी तक मौसम शुष्क रहने, लेकिन बादल छाए रहने का अनुमान जताया है।