नई दिल्ली: जुलाई 2024 में महिला आरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की महिला विंग की अध्यक्ष अलका लांबा को दोषी ठहराया है। हालांकि अदालत ने उन्हें एक वर्ष की अवधि तक अच्छे आचरण (प्रोबेशन) की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषसिद्धि के बावजूद आरोपी को एक साल तक नेकचलनी बनाए रखने की शर्त पर रिहाई दी जाती है। साथ ही उन्हें एक लाख रुपये का निजी मुचलका (बॉन्ड) भरने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यह मामला जुलाई 2024 का है, जब जंतर मंतर पर महिला कांग्रेस द्वारा महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। इस दौरान अलका लांबा के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में सरकारी कार्य में बाधा, धक्का-मुक्की, आदेशों की अवहेलना और सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध करने जैसे आरोप लगे थे।
इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने 25 मई 2026 को सुनवाई के दौरान उन्हें दोषी करार दिया था।
दोषी ठहराए जाने के बाद अलका लांबा ने कहा कि यह आंदोलन उनके संवैधानिक अधिकारों के तहत किया गया था और उन्हें पहले से ही ऐसे फैसले की आशंका थी। हालांकि, इस एक साल में अलका लांबा के अच्छे आचरण के आधार पर उन्हें जेल से रिहा करने की मांग की गई थी।