भारत

चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाने की तैयारी पर कांग्रेस का हमला, विदेश नीति पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या सरकार गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान को भूल चुकी है।

अंजलि भाटिया

नई दिल्ली: सरकारी ठेकों में बोली लगाने वाली चीनी कंपनियों पर लगे पांच साल पुराने प्रतिबंध को हटाने की संभावित योजना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह फैसला मोदी सरकार की अस्थिर और विरोधाभासी विदेश नीति को उजागर करता है, जिसका सीधा असर देश की जनता और राष्ट्रीय हितों पर पड़ रहा है।

विदेश नीति स्पष्ट नहीं

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति किसी स्पष्ट दिशा के बिना एक बेकाबू पेंडुलम की तरह झूल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो पहले कहते थे कि “देश को झुकने नहीं दूंगा”, आज उनके कदम उसी दावे के विपरीत नजर आ रहे हैं। पांच साल से चीनी कंपनियों पर लगा प्रतिबंध हटाने की तैयारी इसका प्रमाण है।

शहीदों का अपमान है

कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि क्या सरकार गलवान घाटी में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान को भूल चुकी है। उन्होंने कहा कि चीन को क्लीन चिट देकर उसकी कंपनियों के लिए रास्ता खोलना शहीदों के सम्मान और देश की सुरक्षा के साथ समझौता है। खड़गे ने यह भी कहा कि भारत के रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार टिप्पणियों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी चिंताजनक है। उनका कहना था कि रोजाना बयान आ रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया जा रहा, जो आत्मसमर्पण जैसा लगता है।

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस के लिए विदेश नीति का अर्थ है—राष्ट्रीय हित सर्वोपरि। लेकिन मोदी सरकार ने गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक संतुलन की परंपरा को कमजोर किया है। कांग्रेस का कहना है कि यह संभावित बदलाव ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और चीन संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और इसी पृष्ठभूमि में चीनी कंपनियों को राहत देने की तैयारी की जा रही है।

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