उत्तर प्रदेश के अनुदानित मदरसों में कथित अवैध नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में दर्ज शिकायत के बाद प्रकाश में आया, जिसके बाद आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जांच के निर्देश दिए हैं।
प्रारंभिक जांच और शिकायत में यह आरोप लगाए गए हैं कि कुछ मदरसा प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने नियमों की अनदेखी करते हुए अपने ही परिवार के सदस्यों जैसे पत्नी, बेटे, दामाद और अन्य रिश्तेदारों को सरकारी अनुदान प्राप्त पदों पर नियुक्त किया।
आरोपों के अनुसार, नियमों से बचने के लिए कुछ प्रबंधकों ने एक विशेष तरीका अपनाया। जब किसी रिश्तेदार की नियुक्ति करनी होती थी, तो प्रबंधक अस्थायी रूप से अपने पद से इस्तीफा देकर नियुक्ति प्रक्रिया को प्रभावित करते थे और बाद में दोबारा उसी पद पर लौट आते थे।
यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर मोहम्मद तल्हा अंसारी द्वारा NHRC में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद सामने आया बताया जा रहा है। शिकायत में अनुदानित मदरसों में फंड और भर्ती प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है।
आयोग ने मामले को मानवाधिकारों और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा मानते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया, जिसके बाद राज्य प्रशासन सक्रिय हुआ।
जांच के दौरान कुछ मदरसों में एक ही परिवार के कई सदस्यों की नियुक्तियों के उदाहरण सामने आने का दावा किया गया है।
जौनपुर के एक मदरसे में एक ही परिवार के कई सदस्य शिक्षक और कर्मचारी पदों पर तैनात बताए गए हैं।
बस्ती जिले के एक मदरसे में प्रबंधक द्वारा कई रिश्तेदारों की नियुक्ति के आरोप लगाए गए हैं।
बाराबंकी के कुछ मदरसों में भी परिवार के सदस्यों की नियुक्तियों के मामले सामने आने की बात कही गई है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और मदरसा शिक्षा परिषद के अधिकारियों ने सभी संबंधित मदरसों के भर्ती रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया और अनुमोदन दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में अनियमितताएं सिद्ध होती हैं, तो संबंधित प्रबंधकों के खिलाफ जालसाजी और सरकारी धन के दुरुपयोग के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले की जांच के आधार पर राज्य सरकार अनुदानित मदरसों की भर्ती प्रक्रिया को और सख्त करने और अपात्र कर्मचारियों की नियुक्तियों की समीक्षा करने पर विचार कर सकती है।