वफादार’ सांसद : ‘आखिरी’ उम्मीद The Indian Express
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...ये 8 ‘वफादार’ सांसद बने ममता की ‘आखिरी’ उम्मीद

लोकसभा में टीएमसी कमजोर, फिर भी आस

कोलकाता : लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित विभाजन और बड़े पैमाने पर ‘विद्रोह’ की खबरों के बीच केवल आठ सांसद ही पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के प्रति निष्ठावान बने हुए हैं। 28 सांसदों वाली इस पार्टी में बहुमत के एक बड़े हिस्से के अलग रुख अपनाने की चर्चा के बीच यह ‘वफादार समूह’ राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस ‘निष्ठावान’ खेमे में लोकसभा में पार्टी के नेता अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, सायनी घोष, महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद शामिल हैं। इनके अलावा सुदीप बंद्योपाध्याय और माला राय भी नेतृत्व के प्रति झुकाव बनाए हुए हैं। यही समूह फिलहाल पार्टी की लोकसभा में रणनीति की रीढ़ माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संख्या में छोटा होने के बावजूद यह समूह संगठनात्मक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इनमें कई अनुभवी सांसद और मीडिया में प्रभाव रखने वाले चेहरे शामिल हैं, जो संसद में पार्टी की उपस्थिति को मजबूत बनाए रख सकते हैं। दूसरी ओर, आंतरिक मतभेदों ने नेतृत्व के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ विद्रोही सांसदों के एनडीए के समर्थन की चर्चा है, तो दूसरी तरफ निष्ठावान खेमे का दावा है कि यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। महुआ मोइत्रा ने विद्रोही सांसदों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें “विश्वासघाती” कहा है और उनसे इस्तीफा देने की मांग की है। वहीं कीर्ति आजाद ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की “साजिश” करार दिया है।

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