कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला और उन्हें ‘गद्दार’ तथा ‘भगोड़ा’ तक करार दिया। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के खिलाफ यह पूरा घटनाक्रम भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इशारे पर चल रहा है।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने कहा कि पार्टी के 29 सांसद ‘मां, माटी और मानुष’ के नाम पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। उन्होंने बागी नेताओं से सवाल किया कि यदि उन्हें पार्टी से शिकायत थी तो चुनाव से पहले क्यों नहीं बोले। उन्होंने कहा कि अगर उनमें राजनीतिक नैतिकता है तो सांसद पद से इस्तीफा देकर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए।
कीर्ति आजाद ने बागी सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस पत्र का जिक्र किया जा रहा है, वह अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है और लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय ने भी ऐसी किसी चिट्ठी के मिलने से इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसदों का बीजेपी नेताओं से संपर्क उनके राजनीतिक इरादों को स्पष्ट करता है।
टीएमसी सांसद ने बागी नेता काकोली घोष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है तो वह खुद को व्हिप कैसे बता सकती हैं। व्हिप का अधिकार पार्टी नेतृत्व तय करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बागी सांसद पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं और बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं।
वहीं, टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी बागी गुट और बीजेपी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास सत्ता, एजेंसियां और सरकारी ताकत हो सकती हैं, लेकिन टीएमसी के पास ‘मां, माटी, मानुष’ और पश्चिम बंगाल की जनता का समर्थन है।
कल्याण बनर्जी ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल कानून) का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि बागी सांसद दल-बदल कानून से बचना चाहते हैं तो उन्हें किसी अन्य दल में औपचारिक विलय की प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने दावा किया कि केवल अलग गुट बनाकर सांसद अपनी सदस्यता नहीं बचा सकते।
टीएमसी में बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच पार्टी और बागी गुट के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इससे पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित राजनीतिक बदलावों की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।