कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई करने को बाद चला रहा था अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह 
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कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर जयपुर से कर रहा था ‘डिजिटल अरेस्ट’

कजाकिस्तान से एमबीबीएस कर चुके डॉक्टर ने साथियों संग ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर में करोड़ों की साइबर ठगी रची, मेडिकल छात्रों के बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए रकम को घुमाकर क्रिप्टो में बदलता था गिरोह

जयपुर में पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। इस गिरोह का मास्टरमाइंड कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुका डॉक्टर निकला है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का मुख्य सरगना सुनील विश्नोई उर्फ कार्तिक है, जो कजाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई कर चुका है। उसके साथ गिरफ्तार आरोपी गणेश चौधरी (29) भी एमबीबीएस डिग्रीधारी है और बाड़मेर का रहने वाला है। वहीं, हसनपुरा निवासी दुष्यंत जांगिड़ को भी गिरफ्तार किया गया है।

कैसे चलता था साइबर ठगी का खेल

यह गिरोह मेडिकल छात्रों के बैंक खातों का इस्तेमाल करके ठगी की रकम को घुमाता था। फर्जी दस्तावेजों के जरिए शेल कंपनियां और बैंक खाते तैयार किए जाते थे या किराए पर लिए जाते थे। ठगी की रकम को तेजी से कई खातों में ट्रांसफर कर उसे ट्रेस से बचाया जाता था। बाद में इस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।

महिला डॉक्टर से 24 लाख की ठगी

इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब जयपुर की महिला डॉक्टर सुरेखा लोढ़ा ने शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता को फर्जी जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर धमकाया गया और घंटों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया। डर के माहौल में उनसे 24 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

जयपुर पुलिस की दक्षिण जिला टीम, डीएसटी और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई का नेतृत्व थानाधिकारी दलबीर सिंह और साइबर टीम ने किया। मुख्य सरगना फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।

10 राज्यों में फैला नेटवर्क

जांच में पता चला है कि इस गिरोह के खिलाफ देश के 10 राज्यों में 100 से अधिक साइबर शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें भारत के कई बड़े राज्य शामिल हैं। पुलिस को आशंका है कि आगे की जांच में और बड़े वित्तीय घोटाले सामने आ सकते हैं।

यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराध अब हाई-एजुकेटेड और टेक-सेवी लोगों की मदद से भी चल रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे डर के जरिए लोगों को मानसिक दबाव में लेकर ठगी की जा रही है, जिससे यह अपराध और भी खतरनाक रूप लेता जा रहा है।

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