रांची : झारखंड के गढ़वा जिले में कथित तौर पर उपचार न मिल पाने के कारण 75-वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति की मौत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को जांच के आदेश दिये हैं।
पीड़ित ने उपचार के लिए बैंक से अपनी पेंशन निकालने की कई बार कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया।
मृतक की पहचान रतन लाकड़ा के तौर पर हुई है। परिवार वालों का दावा है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से बड़गढ़ की बैंक शाखा के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, क्योंकि 'अधूरे ई-केवाईसी' की वजह से उनकी पेंशन जारी नहीं हो पा रही थी।
इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, मुख्यमंत्री ने गढ़वा के उपायुक्त को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये निर्देश दिया कि वे मामले की तुरंत जांच करें, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें और रिपोर्ट सौंपें।
सोमवार को बैंक की शाखा के बाहर धरना देते हुए बहू फूलमनी लाकड़ा ने बताया, मेरे ससुर पिछले तीन महीनों से अपनी पेंशन के लिए बड़गढ़ के बैंक के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन बैंक ने उन्हें यह कहते हुए पेंशन नहीं दी कि उनका ई-केवाईसी लंबित है। वह बीमार थे और पैसों की कमी के कारण उन्हें जरूरी इलाज नहीं मिल सका।
उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार ने बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक से ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा करने का अनुरोध किया था, ताकि लाकड़ा के इलाज के लिए पेंशन निकाली जा सके। उन्होंने दावा किया कि प्रबंधक के दखल के बाद ई-केवाईसी तो पूरी हो गई, लेकिन पैसे नहीं निकाले जा सके और सोमवार को उनके ससुर का निधन हो गया।
बैंक के एक अधिकारी ने हालांकि बताया कि ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोई भी पैसे निकालने के लिए शाखा नहीं आया। इस बीच, गढ़वा के उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने घटना की जांच के लिए एक टीम गठित की।
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री को जवाब देते हुए उपायुक्त ने कहा कि तुरंत कार्रवाई की गई है और रंका के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकारी नियमों के तहत लाकड़ा के परिवार को हरसंभव मदद दी जाएगी।