उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश की नौसेना को और मजबूत करने के लिए 10,000 टन क्षमता वाला नया डेस्ट्रॉयर बनाने का आदेश दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित उत्तर कोरिया यात्रा को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
इस कदम को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे दक्षिण कोरिया और अमेरिका की चिंता बढ़ सकती है।
उत्तर कोरिया के सरकारी अखबार Rodong Sinmun के अनुसार, किम जोंग उन ने हाल ही में नौसैनिक परीक्षणों की निगरानी की और देश की समुद्री सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने नौसेना को आदेश दिया कि “कांग कोन” नामक 5,000 टन श्रेणी के युद्धपोत और एक नए 10,000 टन डेस्ट्रॉयर को जल्द से जल्द परिचालन में लाया जाए।
दक्षिण कोरिया के Institute for National Unification के विशेषज्ञ होंग मिन के अनुसार, यह पहली बार है जब उत्तर कोरिया ने 10,000 टन श्रेणी के डेस्ट्रॉयर का स्पष्ट उल्लेख किया है। इसे देश की नौसैनिक महत्वाकांक्षाओं में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किम जोंग उन यह कदम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित दौरे से पहले अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने के रूप में भी देखे जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, किम जोंग उन ने हाल ही में एक नई परमाणु सामग्री उत्पादन फैक्ट्री का निरीक्षण भी किया और देश के परमाणु हथियार भंडार को तेजी से बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि समुद्र, जमीन और हवा, तीनों मोर्चों पर सैन्य क्षमता को मजबूत करना जरूरी है।
उत्तर कोरिया ने मई 2025 में 5,000 टन के एक युद्धपोत के लॉन्च के दौरान तकनीकी खराबी का सामना किया था, जिसमें जहाज आंशिक रूप से पलट गया था। इस घटना को किम जोंग उन ने गंभीर “लापरवाही” करार दिया था और बाद में जहाज की मरम्मत कर दोबारा लॉन्च किया गया था।
नौसैनिक निरीक्षण के दौरान किम जोंग उन के साथ उनकी बेटी किम जू ए भी मौजूद थीं। उन्हें उत्तर कोरिया के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें और तेज हो गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह कदम न सिर्फ उसकी सैन्य महत्वाकांक्षा को दिखाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि प्योंगयांग आने वाले समय में समुद्री सैन्य ताकत को रणनीतिक रूप से मजबूत करना चाहता है।
इस घटनाक्रम के बाद कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया इस पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं।