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ईरान ने रखी 36 अरब डॉलर की शर्त, ट्रंप क्यों नहीं खोलना चाहते जमे हुए अरबों डॉलर?

युद्ध खत्म करने की बातचीत में सबसे बड़ा रोड़ा बना ईरान का फ्रीज फंड, समझौते से पहले अरबों डॉलर की मांग पर अड़ा तेहरान

वॉशिंगटन/तेहरान : पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अभी भी किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान की उन अरबों डॉलर की संपत्तियों को लेकर है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वर्षों से फ्रीज हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सामने मांग रखी है कि किसी भी प्रारंभिक समझौते से पहले 12 अरब डॉलर की राशि तत्काल जारी की जाए। इसके अलावा 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान 24 अरब डॉलर और जारी किए जाएं। कुल मिलाकर तेहरान करीब 36 अरब डॉलर की रकम तक पहुंच चाहता है।

ईरान का कहना है कि यह उसका अपना पैसा है, जिसे प्रतिबंधों के जरिए रोका गया है। वहीं ईरानी नेतृत्व को अमेरिका पर भरोसा नहीं है। तेहरान का मानना है कि पहले भी वादों के बावजूद अमेरिका ने समझौतों से पीछे हटकर प्रतिबंध दोबारा लागू किए थे।

100 अरब डॉलर से ज्यादा संपत्तियां फंसी

जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान की करीब 100 अरब डॉलर की संपत्तियां दुनिया के विभिन्न हिस्सों में फंसी हुई हैं। यदि इन संपत्तियों तक पहुंच मिलती है तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिल सकता है। इससे निवेश, निर्यात आय और नई तकनीकों तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।

ट्रंप क्यों नहीं मान रहे ईरान की मांग?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार ने संकेत दिए हैं कि अंतिम समझौते के बाद ईरान को कुछ फ्रीज संपत्तियों तक पहुंच दी जा सकती है। हालांकि वॉशिंगटन तत्काल नकद राहत या व्यापक प्रतिबंधों में ढील देने के पक्ष में नहीं दिख रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के लिए यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा भी है। यदि समझौते से पहले अरबों डॉलर जारी किए जाते हैं, तो इसे ईरान की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा सकता है। साथ ही अमेरिका के भीतर भी इस फैसले का राजनीतिक विरोध हो सकता है।

बातचीत जारी, लेकिन गतिरोध बरकरार

पिछले कई हफ्तों से दोनों पक्ष एक-दूसरे के प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं। कई प्रस्ताव दिए और खारिज किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच ट्रंप लगातार यह चेतावनी भी देते रहे हैं कि यदि बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है।

फिलहाल, फ्रीज संपत्तियों की रिहाई का मुद्दा ही शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। जब तक इस पर सहमति नहीं बनती, तब तक अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी समझौते की संभावना मुश्किल नजर आ रही है।

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