बिहार पुलिस में भर्ती हुए करीब 21 हजार नए सिपाहियों की तैनाती का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में पहुंच चुके ये जवान इसी महीने के अंत तक राज्य के विभिन्न जिलों में अपनी जिम्मेदारियां संभालेंगे। हालांकि, ड्यूटी जॉइन करने से पहले पुलिस मुख्यालय ने इनके लिए नई कार्यप्रणाली और तैनाती से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि नव-नियुक्त सिपाहियों को सेवा के पहले पांच वर्षों तक मुख्य रूप से फील्ड ड्यूटी पर ही रखा जाए। इस अवधि में उनकी जिम्मेदारियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, सशस्त्र पुलिस ड्यूटी, नियमित गश्त और अपराधियों की गिरफ्तारी जैसे कार्य शामिल होंगे।
नए आदेश के तहत भर्ती हुए जवानों को किसी भी पुलिस अधिकारी का निजी सुरक्षा कर्मी (बॉडीगार्ड) नियुक्त नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें कार्यालयों या विशेष इकाइयों में भी तैनात नहीं किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि शुरुआती वर्षों में फील्ड अनुभव जवानों के व्यावसायिक विकास के लिए जरूरी है।
डीजीपी ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कई जिलों में नियमित पुलिस बल उपलब्ध होने के बावजूद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होमगार्ड जवानों को दी जाती रही हैं। अब गश्त, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में नए प्रशिक्षित सिपाहियों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये सिपाही बिहार के विभिन्न जिलों में तैनात किए जाएंगे। पुलिस मुख्यालय का उद्देश्य है कि नई भर्ती का अधिकतम उपयोग कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में किया जाए।