

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नया कानून लाने के कदम के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत कर दी है। पार्टी ने इसे रोजगार की गारंटी देने वाली देश की सबसे महत्वपूर्ण योजना पर “बुलडोजर चलाने” जैसा करार देते हुए कहा कि इससे ग्रामीण भारत के काम के अधिकार, आजीविका और जवाबदेही पर सीधा हमला हुआ है।
कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण श्रमिकों के लिए जीवनरेखा रहा है, लेकिन मोदी सरकार के हालिया कदमों से इसकी मूल भावना को समाप्त कर दिया गया है। इसी के विरोध में कांग्रेस ने पूरे देश में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की औपचारिक शुरुआत की है।
उन्होंने बताया कि इस मौके पर देशभर के हर जिला मुख्यालय में कांग्रेस की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं, जिनमें सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने और ग्रामीण गरीबों से उनका कानूनी अधिकार छीनने का आरोप लगाया गया। जयराम रमेश ने कहा कि नया वीबी-जी राम जी एक्ट मनरेगा की गारंटी को कानून से हटाकर सरकार की मर्जी पर निर्भर बना देता है, जिससे ग्राम पंचायतों की भूमिका कमजोर हुई है और मजदूरी की गारंटी व समय पर भुगतान पर सवाल खड़े हो गए हैं।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन 25 फरवरी तक चलेगा। इसकी अगली कड़ी में रविवार को एक दिवसीय उपवास और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन होंगे। 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान, ग्राम सभाओं में चर्चा और राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र बांटे जाएंगे। 30 जनवरी को शहीद दिवस पर वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।
जयराम रमेश ने कहा कि इस आंदोलन को देशभर से व्यापक समर्थन मिल रहा है। सिक्किम, छत्तीसगढ़, राजस्थान, नागालैंड, मणिपुर, पंजाब और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस का संदेश साफ है। मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, अन्यथा यह संघर्ष जारी रहेगा।