सेशन ऐप बना आतंकियों का नया अड्डा!

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली धमाकों के पीछे सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद–सहारनपुर मॉड्यूल के आतंकी डॉ. मुजम्मिल और उमर आपस में ‘सेशन ऐप’ के ज़रिए वार्तालाप करते थे।
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कोलकाता : आतंकी संगठनों के बीच इन दिनों ‘सेशन ऐप’ की मांग तेजी से बढ़ रही है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, दिल्ली धमाकों में शामिल आतंकी भी इसी ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे। यही कारण है कि अब देश की सभी केंद्रीय और राज्य स्तरीय खुफिया एजेंसियों ने इस ऐप पर विशेष नजर रखनी शुरू कर दी है। राज्यों को भी इस संबंध में अलर्ट जारी किया गया है, ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं स्थानीय स्तर पर भी इस ऐप का उपयोग तो नहीं हो रहा।

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली धमाकों के पीछे सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के फरीदाबाद–सहारनपुर मॉड्यूल के आतंकी डॉ. मुजम्मिल और उमर आपस में ‘सेशन ऐप’ के ज़रिए वार्तालाप करते थे। उनके पाकिस्तानी आकाओं से भी बातचीत इसी ऐप के मैसेंजर पर होती थी।

‘अबू उसाका’ नाम का हैंडलर कर रहा था संचालन

खुफिया जाँच में सामने आया है कि दिल्ली ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल ‘अबू उसाका’ नाम के एक विदेशी हैंडलर के संपर्क में रहता था। यह हैंडलर तुर्की नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। उसी ने मुजम्मिल और उमर को ‘सेशन ऐप’ इस्तेमाल करने की सलाह दी थी, यह कहकर कि इससे उनकी निजता सुरक्षित रहेगी और कोई भी एजेंसी उनकी चैट इंटरसेप्ट नहीं कर पाएगी। इसी कारण अब खुफिया एजेंसियां ऐप के उपयोगकर्ताओं पर विशेष निगरानी कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इस बात की जांच भी चल रही है कि ऐप इस्तेमाल करने वालों में कहीं किसी आतंकी संगठन का सदस्य तो शामिल नहीं है।

क्यों खतरनाक है ‘सेशन ऐप’?

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, ऐप के कई फीचर्स इसे आतंकियों के लिए खास बनाते हैं। ऐप खोलने या अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर की आवश्यकता नहीं होती। उपयोगकर्ता केवल नाम देकर अकाउंट बना सकता है, वह नाम असली हो या नकली, इसकी जांच मुश्किल है। चैट का कोई मेटाडेटा स्टोर नहीं होता, जिससे यह पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है कि किसने किससे क्या बातचीत की। ऐप उपयोगकर्ताओं के आईपी एड्रेस को छुपा देता है, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती।

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