

अहमदाबाद : अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर इन दिनों अलग नजारा है, अपनी खूबसूरती, हरे-भरे किनारों और अटल ब्रिज के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच मशहूर रिवरफ्रंट , इस वक्त खुदाई का अड्डा बना हुआ है। 43 डिग्री की चिलचिलाती धूप के बावजूद, सैकड़ों लोग हाथों में छलनी-फावड़ा लेकर नदी की मिट्टी छानने में जुटे हुए हैं। इस उम्मीद में कि शायद कोई खजाना हाथ लग जाए।
नदी में सोना-चांदी दबा होने की अफवाह
दरअसल वासन बैराज के गेटों की मरम्मत के लिए साबरमती का पानी रोक दिया गया है। नदी का तल सूखते ही वहां पानी की जगह इंसानों का सैलाब उमड़ पड़ा है। इसके पीछे हैं सोशल मीडिया पर फैल रहे वो मैसेज, जिनमें दावा किया जा रहा है कि साबरमती की मिट्टी में बरसों से चढ़ावे का सोना-चांदी दबा पड़ा है। ये मैसेज आग की तरह फैल रहे हैं और इन्हें पढ़कर लोग चिलचिलाती गर्मी की परवाह किए बगैर नदी के तल में उतरकर खाक छान रहे हैं।
खजाना नहीं, मिल रही है सिर्फ मायूसी
नदी के सूखे पाट पर कई-कई परिवार अमीर बनने की उम्मीद में जुटे हुए हैं। कोई फावड़ा कुदाल लेकर तो कोई छलनी लेकर मिट्टी में किस्मत ढूंढ रहा है। कोई तो खजाना पाने की हसरत में हाथों से ही रेत को खंगाल रहा है। हालांकि सोना-चांदी पाने की उम्मीद फिलहाल पसीने में बहती नजर आ रही है क्योंकि घंटों की मशक्कत के बाद भी ज्यादातर लोगों के हिस्से में सिर्फ जंग लगा लोहा और तांबे के पुराने सिक्के ही आ रहे हैं।
पूरे परिवार के साथ जुटे हैं लोग
वीरमगाम से पूरे कुनबे के साथ आईं एक महिला का कहना था कि उसने सुना है कि साबरमती सूख गई है और यहां दबा हुआ सोना और गहने मिल रहे हैं इसलिए वह अपने सास-ससुर, पति और छोटे बच्चों के साथ आई है । उसने कहा, 'हम गरीब लोग हैं। अगर कुछ मिल गया तो बच्चों का भविष्य संवर जाएगा। हालांकि हमें तो अभी तक कोई गोल्ड नहीं मिला है, लेकिन हमने सुना है कि जमालपुर और एलिस ब्रिज के किनारे लोगों को कुछ मिला है ।'