चावल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मध्यम वर्ग की चिंता

दो हफ्तों में 3 से 10 रुपए किलो तक महंगा हुआ चावल
New Delhi
महंगा हुआ चावल
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नई दिल्ली : रोजमर्रा के भोजन में सबसे अहम माने जाने वाले चावल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिल रही है। बाजार में मिनीकिट और बांसकाठी जैसी सामान्य किस्मों से लेकर प्रीमियम बारीक दाने वाले चावल तक के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।

कारोबारियों के मुताबिक, पिछले करीब दो सप्ताह में अलग-अलग किस्मों के चावल की कीमत में 3 से 10 रुपए प्रति किलो तक की वृद्धि हुई है। इस तेजी का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके मासिक राशन खर्च में चावल की बड़ी हिस्सेदारी है।

चावल की कीमत बढ़ने के साथ परिवारों को या तो पसंदीदा ब्रांड और किस्म बदलने पड़ रहे हैं या फिर अन्य घरेलू खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है।

आम चावल से प्रीमियम किस्म तक बढ़े दाम

बाजार में चावल की कीमत उसकी किस्म, गुणवत्ता और दाने की लंबाई के अनुसार अलग-अलग होती है। मिनीकिट, बांसकाठी, सामान्य मोटे दाने वाले चावल और प्रीमियम बारीक दाने वाले चावल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ाई है। खासकर बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की कीमतों में अपेक्षाकृत ज्यादा उछाल देखने को मिल रहा है।

सरकारी मूल्य निगरानी आंकड़ों के अनुसार, 3 सितंबर 2026 को देश में चावल का औसत खुदरा भाव 46.21 रुपए प्रति किलो था, जो एक सप्ताह पहले 45.91 रुपए और एक महीने पहले 45.13 रुपए प्रति किलो था। यानी एक महीने में औसत खुदरा कीमत में करीब 1.08 रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

थोक बाजार में भी चावल के दाम ऊंचे बने हुए हैं। 5 सितंबर को अखिल भारतीय औसत थोक कीमत 4,120.98 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज की गई। एक महीने पहले यह 4,050.75 रुपए प्रति क्विंटल थी।

कम बारिश और आपूर्ति को लेकर चिंता भी बनी वजह

चावल की कीमतों में तेजी के पीछे आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में सामान्य से कम बारिश और कमजोर मानसून ने धान की फसल को लेकर चिंता बढ़ाई है।

बारिश की कमी का असर उत्पादन और आगे की आपूर्ति पर पड़ने की आशंका है। इसका असर बाजार की धारणा पर भी पड़ा है। हाल में भारतीय चावल के निर्यात भाव भी बढ़कर एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे घरेलू बाजार में भी कीमतों को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता

आने वाले त्योहारी मौसम में घरेलू खपत बढ़ने की संभावना के बीच चावल की कीमतों में लगातार तेजी मध्यम वर्ग के लिए चिंता का विषय बन गई है। यदि खुदरा बाजार में यह बढ़ोतरी आगे भी जारी रहती है, तो इसका सीधा असर मासिक राशन बजट पर पड़ सकता है।

हालांकि, अलग-अलग शहरों और चावल की किस्मों के अनुसार वास्तविक खुदरा कीमतों में काफी अंतर हो सकता है। सरकारी आंकड़े अखिल भारतीय औसत हैं, इसलिए स्थानीय बाजार में मिनीकेट, बांसकाठी और प्रीमियम चावल की कीमतें इन औसत दरों से काफी अलग हो सकती हैं।

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