संथाली भाषा बना भारत का गौरव, संविधान में मिला विशेष स्थान

यह भाषा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में रहने वाले आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है।
संथाली भाषा बना भारत का गौरव, संविधान में मिला विशेष स्थान
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नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को एक समारोह में संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया। यह समारोह राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया था। संथाली भाषा को वर्ष 2003 के 92वें संशोधन अधिनियम के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह भारत की प्राचीन भाषाओं में से एक है।

संथाली किन राज्यों में बोली जाती है

यह भाषा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में रहने वाले आदिवासी लोगों द्वारा बोली जाती है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि यह सभी संथाली लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि भारत का संविधान अब संथाली भाषा में, ओल चिकी लिपि में उपलब्ध है।

राष्ट्रपति सहित अन्य मंत्री रहे उपस्थित

मुर्मू ने कहा कि इससे वे संविधान को अपनी भाषा में पढ़ और समझ सकेंगे। राष्ट्रपति ने संविधान के शताब्दी वर्ष में इसे ओल चिकी लिपि में उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और उनकी टीम की सराहना की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और मेघवाल सहित अन्य लोग शामिल थे।

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