जंतर-मंतर पर आंदोलन की जीत के बाद शुरू हुई सियासी दावेदारी

आंदोलन की सफलता के बाद जंतर-मंतर बना सियासी दावेदारी का मंच
New Delhi
आंदोलन का श्रेय लेने पहुंचे राजनीतिक दल
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नई दिल्ली : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा होते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को गले लगाकर और नारेबाजी कर अपनी जीत का जश्न मनाया।

हालांकि, यह माहौल अधिक देर तक केवल आंदोलनकारियों तक सीमित नहीं रहा। कुछ ही समय में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने लगे, जिसके बाद प्रदर्शन स्थल पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।

देखते ही देखते प्रदर्शन स्थल विभिन्न दलों के झंडों, बैनरों और नेताओं की मौजूदगी से भर गया। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, आजाद समाज पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे।

मंच के आसपास अलग-अलग दलों के समर्थन में नारे लगने लगे और कई नेताओं ने इसे जनता की जीत बताते हुए दावा किया कि सरकार को आंदोलन के दबाव में झुकना पड़ा।

राजनीतिक दलों की बढ़ती मौजूदगी के साथ ही आंदोलन की सफलता का श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई। मीडिया कैमरों के सामने नेताओं की सक्रियता बढ़ी और समर्थक अपने-अपने दलों के झंडों के साथ तस्वीरें व वीडियो बनाते नजर आए।

कुछ समय पहले तक जहां छात्र और युवा अपनी मांगों को लेकर नारे लगा रहे थे, वहां राजनीतिक नारों की गूंज सुनाई देने लगी। इस बीच कई प्रदर्शनकारियों ने राजनीतिक हस्तक्षेप पर असंतोष भी व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की शुरुआत छात्रों और आम लोगों ने की थी। लंबे समय तक हजारों प्रदर्शनकारी बिना किसी राजनीतिक झंडे के अपनी मांगों को लेकर सड़क पर डटे रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब आंदोलन अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था तब अधिकांश राजनीतिक दल नजर नहीं आए, लेकिन सरकार के फैसले के बाद कई दल अब खुद को इस आंदोलन का हिस्सा बताकर इसकी सफलता का श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन की वास्तविक ताकत उन छात्रों और युवाओं की थी, जिन्होंने भीषण गर्मी, बारिश और लंबे इंतजार के बावजूद लगातार धरना जारी रखा। उनका मानना है कि सरकार का फैसला उनके निरंतर संघर्ष का परिणाम है और इस जीत का श्रेय सबसे पहले आंदोलन में शामिल छात्रों और आम प्रदर्शनकारियों को मिलना चाहिए।

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