

7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पद संभाला था। 25 साल बाद 2026 में उनका सार्वजनिक जीवन गुजरात से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंच चुका है। इस दौरान उनके कार्यकाल में कई बड़े नीतिगत फैसले और योजनाएं लागू हुईं, जिनका असर अर्थव्यवस्था, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता और शासन के अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। इनके प्रभाव और परिणामों पर राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर अलग-अलग आकलन भी होते रहे हैं।
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद सरकार की शुरुआती बड़ी पहलों में Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana शामिल रही। इसका उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं से बाहर रह गए लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना था। इसके साथ Aadhaar और Mobile को जोड़कर JAM ढांचे पर भी जोर दिया गया।
इसी साल Swachh Bharat Abhiyan की शुरुआत हुई। 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किए गए इस अभियान को देशभर में स्वच्छता और sanitation को लेकर बड़े जनअभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया। इसके तहत खुले में शौच, शौचालय निर्माण और साफ-सफाई को लेकर बड़े स्तर पर सरकारी और सामाजिक प्रयास किए गए।
इसके दो साल बाद 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने Demonetisation का ऐलान किया। ₹500 और ₹1,000 के पुराने नोटों को legal tender से बाहर करने के फैसले को सरकार ने black money, corruption, counterfeit currency और terror financing के खिलाफ कदम के तौर पर पेश किया था। इस फैसले के बाद देशभर में बैंकों और ATM के बाहर लंबी कतारें लगीं और cash-dependent अर्थव्यवस्था पर तत्काल असर पड़ा।
इसके बाद GST के जरिए देश में अलग-अलग indirect taxes की जगह एक unified tax structure लाने की दिशा में बड़ा बदलाव हुआ। Make in India, Digital India, Startup India और Aatmanirbhar Bharat जैसे अभियानों के जरिए manufacturing, technology, entrepreneurship और domestic production पर जोर दिया गया।
Digital economy के मोर्चे पर UPI भारत के सबसे चर्चित बदलावों में शामिल रहा। Aadhaar, Jan Dhan और Mobile के साथ Digital Payments के विस्तार ने बैंकिंग और रोजमर्रा के लेनदेन को तेजी से बदला। IMF की 2026 की एक समीक्षा में भी Aadhaar, UPI और Direct Benefit Transfer को भारत के Digital Public Infrastructure के प्रमुख हिस्सों के रूप में रेखांकित किया गया है।
आर्थिक मोर्चे पर भी पिछले वर्षों में भारत की growth story चर्चा में रही है। अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में भारत की real GDP growth 7.8% रही, जो RBI के उस तिमाही के 7% अनुमान से ऊपर थी। हालांकि, मौजूदा IMF ranking में भारत nominal GDP के आधार पर दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसलिए 2026 में इसे “दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था” कहना सही नहीं होगा।
25 साल के इस सफर में मोदी के कार्यकाल को सिर्फ चुनावी राजनीति के नजरिये से नहीं, बल्कि उन नीतिगत बदलावों के जरिए भी देखा जा सकता है जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था, Digital Infrastructure, welfare delivery और governance के तरीके को प्रभावित किया। इन पहलों के परिणामों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के अलग-अलग आकलन रहे हैं, लेकिन यह अवधि भारतीय सार्वजनिक जीवन में कई बड़े policy shifts की गवाह रही है।