परिसीमन को लेकर एनडीए में रणनीति तेज, सर्वदलीय सहमति बनाने की कोशिश

सीटों के पुनर्निर्धारण पर सहयोगियों को साथ लाने की कवायद, विपक्ष की संभावित आपत्तियों को ध्यान में रखकर रोडमैप तैयार
दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संभावित प्रभावों को कम करने के विकल्पों पर भी विचार
केंद्र की एनडीए सरकार ने परिसीमन (Delimitation) जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नई कवायद शुरू कर दी है
Published on

देश की राजनीति में एक बार फिर बड़े नीतिगत बदलावों की आहट सुनाई दे रही है। केंद्र की एनडीए सरकार ने परिसीमन (Delimitation) जैसे संवेदनशील मुद्दे पर नई कवायद शुरू कर दी है। इस प्रक्रिया में सरकार का फोकस केवल विधायी कदमों पर नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति बनाने पर भी है।

नए ड्राफ्ट को लेकर कानून मंत्रालय ने शुरू की समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कानून मंत्रालय ने परिसीमन के पुराने मसौदे की समीक्षा शुरू कर दी है और एक संशोधित ड्राफ्ट तैयार करने पर काम चल रहा है। उद्देश्य यह है कि क्षेत्रीय चिंताओं को संतुलित करते हुए एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया जाए जो संवैधानिक और राजनीतिक रूप से स्वीकार्य हो। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार संभावित प्रभावों को कम करने के विकल्पों पर विचार कर रही है।

दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संभावित प्रभावों को कम करने के विकल्पों पर भी विचार
दिल्ली में टैक्स फ्री हुई कंगना रनौत की ‘भारत भाग्य विधाता’

एनडीए की हाई-प्रोफाइल बैठक पर सबकी नजर

नई दिल्ली में होने वाली एनडीए की आगामी बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। इसमें लगभग 35 सहयोगी दलों के 75 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक हाल ही में हुई है। माना जा रहा है कि यह एनडीए की राजनीतिक एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का भी संकेत है।

विधेयक पारित कराने पर फोकस

परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक बदलाव के लिए संसद में मजबूत संख्या बल जरूरी होगा। इसी कारण एनडीए के भीतर सहयोगी दलों को साथ रखने और नए राजनीतिक समीकरण बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है। इस क्रम में तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम जैसे प्रमुख क्षेत्रीय दलों की स्थिति और रुख पर भी राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

दक्षिण भारत की चिंताएं फिर केंद्र में

दक्षिण भारतीय राज्यों में यह चिंता लंबे समय से बनी हुई है कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण परिसीमन के बाद लोकसभा में उनकी सीटें कम हो सकती हैं। सरकार इस मुद्दे पर ऐसा फॉर्मूला तलाशने की कोशिश कर रही है जिससे किसी भी राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नकारात्मक असर न पड़े।

संगठनात्मक स्तर पर भी बड़े बदलाव की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव की तैयारी कर रही है। नितिन नवीन के नेतृत्व में नई टीम की घोषणा की संभावना जताई जा रही है, जिसमें अनुभवी और युवा नेताओं का संतुलन होगा।

कई राज्यों में संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ विचार-विमर्श अंतिम चरण में है। परिसीमन पर नई पहल, एनडीए की बड़ी बैठक और संगठनात्मक फेरबदल आदि घटनाक्रमों से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में देश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव और तेज गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

दक्षिण भारतीय राज्यों में परिसीमन को लेकर उठ रही चिंताओं को ध्यान में रखते हुए संभावित प्रभावों को कम करने के विकल्पों पर भी विचार
झारखंड हाई कोर्ट का निर्देश : रेप मामलों में तुरंत दर्ज होगी जीरो FIR, टू-फिंगर टेस्ट पर रोक
Google पर संवाद सर्च बनाएं →
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in