उद्धव ठाकरे भाजपा के साथ रहते तो शिवसेना का चुनाव चिह्न उनके पास ही होता: आठवले

उद्धव ठाकरे भाजपा के साथ रहते तो शिवसेना का चुनाव चिह्न उनके पास ही होता: आठवले

आठवले ने 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे की राजनीतिक पसंद को जिम्मेदार ठहराया।
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मुंबई: केंद्रीय मंत्री और आरपीआई (ए) प्रमुख रामदास आठवले ने कहा है कि अगर उद्धव ठाकरे 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन करने के बजाय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी बने रहते, तो शिवसेना का चुनाव चिह्न 'धनुष-बाण' उन्हीं के पास होता। आठवले ने 2022 में शिवसेना में हुए विभाजन के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे की राजनीतिक पसंद को जिम्मेदार ठहराया।

निर्वाचन आयोग ने 2023 में एकनाथ शिंदे नीत धड़े को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी और उसे ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित करने का आदेश दिया, जिससे उद्धव ठाकरे नीत गुट को बड़ा झटका लगा। उद्धव के पिता बाल ठाकरे ने 1966 में शिवसेना की स्थापना की थी। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। इससे पहले सोमवार को शिवाजी पार्क में महायुति की एक रैली को संबोधित करते हुए आठवले ने कहा, ‘‘2019 के विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे को भाजपा के साथ ही रहना चाहिए था क्योंकि शिवसेना सीटें जीतने के मामले में दूसरे नंबर पर थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह भाजपा के साथ रहते तो धनुष-बाण चिह्न उनके पास ही रहता। दिवंगत बालासाहेब ठाकरे ने कांग्रेस का विरोध किया था, लेकिन उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री बनने के लिए उसी पार्टी के साथ हाथ मिला लिया।’’ आठवले ने बीएमसी में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि नगर निकाय को "उद्धव ठाकरे के चंगुल से मुक्त" कराने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘‘बीएमसी को महायुति गठबंधन के नियंत्रण में आना चाहिए।’’

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