

बेंगलुरु: कर्नाटक में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को सिद्धरमैया को ‘सबसे अधिक कर्ज लेने वाला मुख्यमंत्री’ करार दिया और उन खबरों का हवाला दिया जिनमें कहा गया है कि राज्य सरकार जनवरी से मार्च तक की चौथी तिमाही में 93,000 करोड़ रुपये का कर्ज ले सकती है। सिद्धरमैया द्वारा कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का इतिहास रचे जाने पर विपक्ष ने कर्ज को लेकर उनकी आलोचना की।
सिद्धरमैया पर वित्त मंत्रालय का भी प्रभार
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार पर ‘कर्नाटक को पीछे धकेलने’ का आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्धरमैया को यह समझना चाहिए कि इतिहास केवल कार्यकाल की अवधि को महत्व नहीं देता बल्कि उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत के आधार पर उनका मूल्यांकन करता है। उन्होंने कहा, “सिद्धरमैया सिर्फ सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नहीं बल्कि सबसे अधिक कर्ज लेने वाले मुख्यमंत्री भी हैं।”
'X' पर लिखा
अशोक ने ‘एक्स’ एक पोस्ट में कहा, “आंकड़ों और विरासत में अंतर यह है कि सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का खिताब महज एक आंकड़ा है। सबसे अधिक कर्ज लेने वाले मुख्यमंत्री का खिताब एक विरासत है।” उन्होंने कहा, “इनमें से एक को भुला दिया जाएगा जबकि दूसरे को कर्नाटक के इतिहास में हमेशा के लिए याद रखा जायेगा।” अशोक ने नवीनतम आंकड़ों को चौंकाने वाला बताते हुए कहा, “एक ही तिमाही में 93,000 करोड़ रुपये का कर्ज, भारत में चौथी तिमाही में लिया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा कर्ज होगा। इसे शासन नहीं कहा जा सकता, यह घबराहट में किए गए वित्तीय प्रबंधन की सटीक परिभाषा है।”
राजकोषीय ढांचे का पतन
भाजपा नेता के अनुसार, यह कर्ज में भारी वृद्धि राजकोषीय ढांचे के पतन के कारण हुई है, जिनमें पिछले ऋणों को चुकाने के लिए उधार लेना, अस्थिर गारंटी योजनाओं को खतरनाक रूप से वित्तपोषित करने के लिए उधार लेना और बुनियादी आर्थिक नियोजन की विफलता के कारण नकदी प्रवाह में भारी गिरावट आना शामिल है। उन्होंने कहा, “जब किसी सरकार को केवल अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए हर महीने औसतन 31,000 करोड़ रुपये उधार लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तो यह मजबूती का संकेत नहीं बल्कि राजकोषीय तनाव का स्पष्ट सूचक है।”
सिद्धरमैया का खोखला कार्यकाल
विपक्षी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को यह समझना चाहिए कि इतिहास उनके खोखले कार्यकाल को महत्व नहीं देता। उन्होंने कहा, “इतिहास उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत के रिकॉर्ड का मूल्यांकन करेगा। और आज जो पीछे छूट रहा है वह निर्विवाद है: कर्ज का पहाड़, अक्षमता के स्पष्ट निशान और कर्नाटक राज्य का गिरवी रखा हुआ भविष्य।” अशोक ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड मिट जाते हैं, विरासत खड़ी रहती हैं।