त्योहारी सीजन से पहले सस्ता हो सकता है खाद्य तेल

आयात शुल्क घटाने की तैयारी में सरकार
New Delhi
सस्ता हो सकता है खाद्य तेल
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नई दिल्ली: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले आम उपभोक्ताओं को खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है। सरकार वेजिटेबल ऑयल पर लगने वाले आयात शुल्क में कटौती करने के विकल्प पर विचार कर रही है।

यदि यह फैसला लागू होता है तो घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। यह जानकारी रॉयटर्स की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है।

एक साल में करीब 20 फीसदी बढ़ी कीमतें

खाद्य तेल की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान करीब 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने के उपायों पर विचार कर रही है। त्योहारों के दौरान मिठाई, नमकीन और अन्य तली हुई खाद्य वस्तुओं की खपत बढ़ने से खाद्य तेल की मांग भी बढ़ती है।

भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात करता है। देश में मुख्य रूप से पाम ऑयल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल विदेशों से मंगाया जाता है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन शामिल हैं।

बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में 5% कटौती पर विचार

जानकारी के अनुसार सरकार बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में 5 फीसदी तक कटौती के विकल्प पर विचार कर रही है। साथ ही किसानों के हितों को भी ध्यान में रखने की बात कही गई है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य घरेलू बाजार में कीमतों का दबाव कम करना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।

कीमतों पर कितना पड़ेगा असर?

हालांकि आयात शुल्क में कमी से राहत की उम्मीद है, लेकिन इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर भी निर्भर करेगा। मांग बढ़ने पर पाम और सोयाबीन तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी आ सकती है। ऐसे में उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने संकेत दिया है कि केवल आयात शुल्क घटाना कीमतों को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।

फिलहाल सरकार की ओर से अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई है। यदि शुल्क में कटौती होती है तो त्योहारी खरीदारी के दौरान खाद्य तेल की कीमतों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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