

नयी दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास एक इमारत के ढहने की घटना में सात लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अवैध निर्माण कार्यों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को गैरकानूनी ढांचों पर बुलडोजर चलाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान के मुताबिक, गुप्ता के इस निर्देश के बाद बुधवार को दिल्ली के कई इलाकों में कार्रवाई की जा रही है।
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने नगर निगम के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को जमीन पर मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं ताकि कार्रवाई का प्रभावी संचालन हो सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आदेश जारी करते हुए कहा कि दिल्ली के सभी ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) छात्रावासों का सघन निरीक्षण किया जाए और जहां भी अवैध निर्माण पाया जाए, वहां तुरंत कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा, गुप्ता ने भवनों के रिकॉर्ड खंगालने के भी आदेश दिए हैं। उन्होंने यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माण आखिर किस वर्ष में हुआ था और उस समय यह किस अधिकारी के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता था। सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत रविवार को दोपहर करीब 1:30 बजे मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई जबकि पांच अन्य घायल हो गए। नगर निगम के मंगलवार तक के आंकड़ों के अनुसार, सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद 24 संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई और सात अवैध संरचनाओं को सील कर दिया गया। कुल मिलाकर, एक जून से आठ सितंबर के बीच, एमसीडी ने 1,007 संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की और 471 अन्य को सील किया। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि के दौरान, इसने 3018 कारण बताओ नोटिस जारी किए थे जिनमें से 1,551 अनधिकृत निर्माण के लिए, 714 सीलिंग के लिए और 753 ध्वस्तीकरण के लिए थे।
इससे पहले, गुप्ता और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने अधिकारियों को पीजी आवास केंद्रों, विशेष रूप से उन इमारतों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था, जिन्होंने प्रथम दृष्टया निर्धारित ऊंचाई और मंजिल संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। उपराज्यपाल ने यह भी निर्देश दिया था कि पीजी केंद्रो में सभी इमारतों का संरचनात्मक ऑडिट एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद निगम अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई, जिसमें दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त सहित पांच अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया।
सीएमओ ने मंगलवार को बताया था कि संबंधित जोन के अधिकारियों को भवन सुरक्षा, आवश्यक अनुमतियों, अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी), संरचनात्मक स्थिरता प्रमाण-पत्र और अन्य निर्धारित मानकों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जोनल स्तर पर वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी कार्रवाई की निगरानी करेंगे।