

बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात ‘अर्नब’ की तीव्रता बढ़ने के साथ देश के कई हिस्सों में मौसम बिगड़ने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 27 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश, यानम, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना समेत कई राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी दी है। आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों और केंद्रशासित प्रदेश यानम में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका के बीच रेड अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, चक्रवात 28 अक्टूबर की सुबह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश तथा यानम के तट को पार कर सकता है। इस दौरान हवा की अधिकतम निरंतर गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
बंगाल की खाड़ी से कैसे उठा अर्नब?
चक्रवात अर्नब का सफर 23 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बने कम दबाव के क्षेत्र से शुरू हुआ। समुद्र के ऊपर बना यह मौसमी तंत्र धीरे-धीरे मजबूत हुआ। 24 अक्टूबर तक इसके अवदाब में बदलने और अगले दिन गहरे अवदाब में तब्दील होने का अनुमान था। इसके बाद 26 अक्टूबर को यह चक्रवाती तूफान बना और आगे बढ़ते हुए अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान की श्रेणी में पहुंच गया।
27 अक्टूबर की सुबह मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, तूफान बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में था और विशाखापत्तनम से लगभग 260 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था। इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने और फिर उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़कर आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचने का अनुमान है।
समुद्र का गर्म पानी और अनुकूल हवाएं बनीं वजह
उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का गर्म होना, हवा में पर्याप्त नमी और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियां अहम होती हैं। गर्म समुद्र से पानी का वाष्पीकरण बढ़ता है। नम हवा ऊपर उठकर ठंडी होती है, जिससे बादल बनते हैं और संघनन के दौरान ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा तूफान को और ताकत दे सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान लगभग 29 डिग्री सेल्सियस था, जो चक्रवात के विकास के लिए अनुकूल माना जाता है। इसके साथ ऊंचाई के साथ हवा की गति और दिशा में बहुत अधिक अंतर न होना, यानी हवा का कम ऊर्ध्वाधर कतराव, भी तूफान को मजबूत होने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी चक्रवात की तीव्रता केवल एक कारण से तय नहीं होती; समुद्र और वातावरण की कई परिस्थितियां मिलकर इसका रास्ता और ताकत निर्धारित करती हैं।
आंध्र प्रदेश और यानम में सबसे ज्यादा खतरा
मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों काकीनाडा, कोनसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिमी गोदावरी और एलुरु के साथ यानम के लिए 27 अक्टूबर को रेड अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश और सामान्य जनजीवन बाधित होने की आशंका है। राज्य के अन्य तटीय जिलों के लिए भी भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
तूफान के तट पार करने के दौरान तेज हवाओं के अलावा समुद्र में ऊंची लहरें उठने का खतरा है। मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के निचले तटीय इलाकों में समुद्री जलस्तर बढ़ने और पानी घुसने की आशंका भी जताई है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
ओडिशा, तेलंगाना और दूसरे राज्यों में भी असर
ओडिशा में 27 से 29 अक्टूबर के बीच बारिश की गतिविधियां तेज रहने का अनुमान है। दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों में 28 अक्टूबर को अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। राज्य में तेज हवाओं, आकाशीय बिजली और गरज के साथ बारिश की भी आशंका है। तेलंगाना में 28 और 29 अक्टूबर को बारिश तेज हो सकती है, जबकि छत्तीसगढ़ और विदर्भ में भी भारी बारिश का अनुमान है।
तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, केरल और माहे में 27 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। झारखंड में 28 से 30 अक्टूबर के बीच बारिश की संभावना है, जबकि बिहार में 29 अक्टूबर से बारिश बढ़ सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 29 और 30 अक्टूबर को व्यापक बारिश और कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
बंगाल में बारिश, मछुआरों को समुद्र से दूर रहने की सलाह
पश्चिम बंगाल भी इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से अछूता नहीं रहेगा। गंगा के मैदानी हिस्सों में 28 और 29 अक्टूबर को कई जगह बारिश हो सकती है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 29 और 30 अक्टूबर को व्यापक बारिश की संभावना जताई गई है। कोलकाता सहित दक्षिण बंगाल में भी मौसम बदल सकता है। हालांकि, बंगाल के सीधे चक्रवात की राह में आने की संभावना नहीं जताई गई है।
समुद्र में खराब होती परिस्थितियों को देखते हुए मछुआरों को बंगाल की खाड़ी के प्रभावित हिस्सों में नहीं जाने की सलाह दी गई है। पहले से समुद्र में मौजूद नावों और जहाजों को सुरक्षित तट पर लौटने को कहा गया है। केंद्र और राज्य सरकारों ने बचाव दलों को तैयार रखा है, जबकि संवेदनशील इलाकों में राहत और निकासी की तैयारियां की जा रही हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य चक्रवात के दौरान जान-माल के नुकसान को कम करना है।
अर्नब नाम क्यों रखा गया?
चक्रवातों के नाम पहले से तय क्षेत्रीय सूची के अनुसार रखे जाते हैं, ताकि मौसम विभाग, प्रशासन और आम लोग चेतावनियों को आसानी से पहचान सकें। ‘अर्नब’ नाम बांग्लादेश ने सुझाया था। इसका अर्थ समुद्र या महासागर बताया जाता है। नामकरण का उद्देश्य तूफान की पहचान और उससे जुड़ी सूचनाओं को स्पष्ट बनाना है, न कि उसकी तीव्रता बताना।