

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह में कहा कि अपने नायकों के योगदान को भुलाने से वैचारिक रिक्तता पैदा होती है। उन्होंने सिंघल के जीवन और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने को शताब्दी वर्ष का महत्वपूर्ण उद्देश्य बताया।
शाह ने सिंघल के जीवन को त्याग, सादगी, राष्ट्रभक्ति, धर्मनिष्ठा और संघर्ष का उदाहरण बताते हुए हिंदू धर्म, वेद-उपनिषद, भारतीय संस्कृति और संत परंपरा के प्रति उनके समर्पण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन सिंघल के सार्वजनिक जीवन का प्रमुख हिस्सा रहा और उन्होंने राम मंदिर निर्माण के अभियान के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
आरएसएस के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने सिंघल के व्यक्तित्व में दृढ़ वैचारिक प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के समन्वय का उल्लेख किया। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक सेवा और संगठन निर्माण में सिंघल के योगदान को रेखांकित किया।
समारोह में अयोध्या के राम वन-गमन पथ पर स्थापित होने वाले 11 ‘श्रीराम स्तंभों’ का डिजिटल लोकार्पण किया गया। साथ ही सिंघल के जीवन, संगठनात्मक कार्यों और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी तस्वीरों, दस्तावेजों व ऐतिहासिक सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई।