

नई दिल्ली : वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
इमरान मसूद का बयान
कांग्रेस के लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने अदालत के फैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि ताहिर हुसैन को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उनका नाम "ताहिर" की जगह "कपिल" होता तो उन्हें बरी कर दिया जाता। मसूद के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा
इमरान मसूद के बयान पर बीजेपी ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस नेतृत्व से इस बयान पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह कांग्रेस की आधिकारिक सोच है और क्या यह बयान राहुल गांधी की सहमति या निर्देश पर दिया गया है।
भाटिया ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह न्यायपालिका के फैसले पर इस प्रकार की टिप्पणी का समर्थन करती है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राहुल गांधी इमरान मसूद से इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मंगवाएंगे।
न्यायिक फैसले पर राजनीति का आरोप
बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस अदालत के फैसले को धार्मिक रंग देने का प्रयास कर रही है। पार्टी का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए तथा ऐसे मामलों में धार्मिक आधार पर टिप्पणी करना उचित नहीं है।
वहीं, इमरान मसूद के बयान के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी जारी है और पूरे मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार बढ़ रही हैं।